जेयू में मनाया गया जनजातीय गौरव दिवस

Nov 11 2025

ग्वालियर। वंदे मातरम और बिरसा मुंडा दोनों ही समतुल्य हैं। वंदे मातरम भारत को स्वतंत्र करने का मंत्र है। ऐसा मंत्र जो हम सबको एकत्रित करता है, यह मातृभूमि की सेवा का मंत्र है। बिरसा मुंडा को भी हम वंदे मातरम के समतुल्य मान सकते हैं।स्वराज के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया।
बिरसा मुंडा में समाज को संगठित करने की अद्भुत क्षमता थी। अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ वह हमेशा लड़ते रहे।बिरसा मुंडा को उनके अनुयायियों ने धरती आबा अर्थात् पृथ्वी पिता कहा, क्योंकि उन्होंने अपने लोगों को भूमि से जुड़ाव और प्रकृति के सम्मान का सन्देश दिया। वे मानते थे कि प्रकृति हमारी मां है और उसका संरक्षण ही मानवता का सच्चा धर्म है। यह बात मंगलवार को प्रो. राजेंद्र बांदिल ने जेयू के गालव सभागार में आयोजित धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के समापन वर्ष के उपलक्ष्य में बतौर मुख्य अतिथि कही। विशिष्ट अतिथि के रूप में जेयू की पूर्व कार्य परिषद सदस्य शेवंती भगत उपस्थित रहीं। वहीं अध्यक्षता कुलगुरू डॉ.राजकुमार आचार्य ने की।
प्रो. जेएन गौतम के स्वागत भाषण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित शेवंती भगत ने कहा कि बिरसा मुंडा से पहले जितने भी विद्रोह हुए वह जमीन बचाने के लिए हुए। लेकिन बिरसा मुंडा ने तीन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उलगुलान किया। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राजकुमार आचार्य ने कहा कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को उलीहातु गांव (झारखंड) में हुआ था। वे मुंडा जनजाति से सम्बन्ध रखते थे और बहुत ही साधारण किसान परिवार में पले-बढ़े। बाल्यावस्था से ही उनमें असाधारण नेतृत्व क्षमता, सामाजिक चेतना और धार्मिक आस्था थी।
कुलसचिव प्रो. राकेश कुशवाह ने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन हमें यह सिखाता है कि प्रकृति के साथ संतुलन, सामाजिक समानता, और आत्मनिर्भरता ही विकास का सच्चा मार्ग है। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को शॉल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। 
इस अवसर पर प्रो. विवेक बापट, प्रो. एसएन मोहापात्रा, प्रो. शांतिदेव सिसौदिया, प्रो.डीसी गुप्ता, प्रो. एसके श्रीवास्तव, प्रो. एसके सिंह, प्रो.हेमंत शर्मा, प्रो.आई के पात्रों, प्रो.वायके जायसवाल, प्रो.एमके गुप्ता, प्रो.स्वर्णा परमार, डॉ.जीके शर्मा, डॉ. पीके जैन, डॉ. सतेंद्र सिकरवार, डॉ. विमलेंद्र सिंह राठौर सहित छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।