भगवान की भक्ति से ही कलयुग में प्राणी भव से पार हो जाता है: भागवताचार्य
Nov 10 2025
ग्वालियर। अचलेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही भागवत कथा के छठे दिन भागवताचार्य वेदांत महाराज ने कहा कि भगवान की कथा मन को पवित्र आत्मा को गर्वित और चरित्र को निर्मल कर देती है। जैसे-जैसे हम भगवान की कथा को सुनते चले जाते हैं। वैसे-वैसे वह हमारे मन की सफाई करती चली जाती है कथा मन को प्रसन्न करती है और चित्त को शांत करती है।
महाराज ने कहा भागवत कथा विवेक को जागृत कर देती है नियमित कथा का श्रवण एवं मनन करने वाला व्यक्ति गलत काम कर ही नहीं सकता है ।उन्होंने कहा हमें सदा ऐसा आचरण करना चाहिए कि हमारे व्यवहार और वाणी से किसी को दुख न पहुंचे उन्होंने कहा कि भगवान ने जब रास किया तो जितनी रूपियां थी भगवान उतने ही स्वरुप में प्रकट हो गए। व्यास पीठ से महाराज जी ने कहाभक्त वत्सल भगवान भक्तों के उद्धार के लिए अवतार लेते हैं और अपनी लीला रचाते हैं।
महाराज ने कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा की रुक्मणी मन ही मन भगवान कृष्ण को अपना पति स्वीकार कर चुकी थी लेकिन रुक्मणी को भगवान तक पहुंचना दुर्लभ था रुक्मणी ने देखा कि हमारे पिता और भाई शिशुपाल से शादी करने के लिए तैयार हो रहे हैं तो उन्होंने एक पंडित के माध्यम से भगवान कृष्ण को पत्र भेजा और अंत में लिख दिया यदि आप नहीं आए तो हम अपने प्राण त्याग दूंगी भगवान कृष्ण के प्रति अतुल श्रद्धा और प्रेम देखकर भगवान रथ पर सवार होकर रुक्मणी जी के पास पहुंचे रुक्मणी जैसे ही गौरी पूजन को आती है वैसे ही भगवान उनका हरण कर ले जाते हैं और फिर धूमधाम से द्वारका में उनका विवाह होता है।
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