वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देश के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक है-जयभान सिंह पवैया

Nov 07 2025

ग्वालियर। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के शुक्रवार को 150 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद एवं महाराष्ट्र के सहप्रभारी भाजपा ने शुक्रवार को ग्वालियर के वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। 
उन्होंने ने कहा कि आज पूरा भारत कोने-कोने में वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ मना रहा है। जब मैं वंदे मातरम् कहता हूं तो मेरा रोम-रोम रोमांचित हो जाता है। वंदे मातरम् दो शब्द का नाम नहीं है, वंदे मातरम् देशभक्ति का परिचाक शरीर का मंत्र कहा जाता है। जो शक्ति मंत्र में होती है वही शक्ति वंदे मातरम में होती है। अगर वह केवल दो शब्द होते तो आजादी की लड़ाई लड़ते समय खुशीराम बोस की उम्र 18 साल थी जब उन्होंने एक अंग्रेज की हत्या कर दी थी तो उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी, जब उन्हें फांसी के लिए ले जाया जा रहा था तब उनसे उनकी अंतिम इच्छा पूंछी तो उन्होंने कहा कि एक हाथ में मैं गीता की किताब लेकर जाऊंगा और कंठ में वंदे मातरम् बोलने के बाद ही मैं फांसी के फंदे पर झुलूंगा। अगर ये शब्द होते तो अपनी सांस को खुशीराम वंदे मातरम् के लिए अर्पित नहीं करते।
उन्होंने कहा कि जब बिस्मिल को फांसी दी गई तो उनकी अंतिम इच्छा थी कि वेद लक्ष्णा गौ की दो बूंद मेरे गले में डाल दो और खुली हवा में वंदे मातरम् कहने दो। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम इस देश की आजादी की लड़ाई का कलम से निकला हुआ सबसे बड़ा हथियार था। 
उन्होंने कहा कि 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम् गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थीं।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आव्हान पर देशभर में जगह-जगह भाजपा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ मना रही है। इसी क्रम में ग्वालियर में भी राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का शब्द जैसे ही हमारे जहन में आता है तो व्यक्ति राष्ट्र की भावना से ओतप्रोत हो जाता है और देश के लिए कुछ करने की सोचने लगता है। जब 1857 में की क्रांति के बाद लोगों को लगा कि देश में कोई ऐसा गीत बनना चाहिए जिससे लोगों के दिलों के अंदर राष्ट्रीयता की भावना जागृत हो और देश की स्वतंत्रता के लिए वरदान हो जाए। इस गीत की भावनाओं ने देश को आजादी दिलाई। इस गीत की वजह से हमारे क्रांतिकारी खुशी-खुशी फांसी पर चढ़ गए।
इस अवसर पर मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, श्रीमती माया सिंह, विवेक नारायण शेजवलकर, अभय चौधरी,  श्रीमती चारु चौधरी, रमेश अग्रवाल, विनय जैन, विनोद शर्मा, राजू पलैया,  पूर्व महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, वेद प्रकाश शर्मा, अशोक जैन, जितेंद्र गुर्जर, अशोक शर्मा, डॉ. अरविंद राय, अशोक जादौन, राजेश दुबे, श्रीमती खुशबू गुप्ता, मुन्नालाल गोयल, रामेश्वर भदौरिया, धर्मेंद्र राणा,  कनवर किशोर मंगलानी, राजू सेंगर, दीपक शर्मा, केशव माझी,सुधीर गुप्ता, श्रीमती हेमलता बुधोलिया सहित जिला मीडिया प्रभारी नवीन चौधरी, अरविंद रघुवंशी,  अजीत बरैया, बिरजू शिवहरे, श्रीमती मधुलिका क्षीरसागर, श्रीमती किरण लता भदौरिया, श्रीमती गीता भदौरिया, श्रीमती शकुंतला परिहार, श्रीमती कृष्णा महोबिया, श्रीमती उषा चौहान, श्रीमती निशा गुप्ता, श्रीमती रीता, श्रीमती ज्योति पाठक, श्रीमती शर्मिला वर्मा, श्रीमती रिया शर्मा आदि उपस्थित रहे।