पंच कल्याणक के माता पिता ओर पात्रों का सम्मान समारोह
Nov 03 2025
ग्वालियर। फूलबाग मैदान में 11 से 16 नवंबर तक छह दिवसीय श्रीचौबीसी पंचकल्याण जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव के अनुष्ठान में मुख्य क्रियाओं की सहभागिता करने वाले भगवान के मुख्य माता पिता की गोद भराई एवं 24 माता पिता, 24 सौधर्म इंद्र, 24 कुबेर ओर अन्य पत्रों का सम्मान समारोह आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य ओर पंचकल्याणक महोत्सव समिति के द्वारा नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में प्रमुख पात्रों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। पंचकल्याणक में इन प्रमुख पात्रों के द्वारा पाषाण से भगवान बनने के महा अनुष्ठान में मुख्य क्रियाओं की सहभागिता करेंगे।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पंचकल्याण के 24 माता पिता की गोद नारियल, मखाने, किशमिश, बादाम, काजू, फल, मिठाई आदि से भरी। पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्रो में 24 सौधर्म इंद्र, 24 कुबेर, 24 बुआ एवं 24 भगवान के माता-पिता आदि इंद्र इंद्राणी पत्रों का माला दुपट्टा और मुकुट पहनकर तिलक लगाकर सम्मान किया।
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिनके पूर्वको की कमाई की संपति को यदि धार्मिक ज्ञान दान में लगाई जाए तो उस धन का सार्थकता सिद्ध होती है। निग्रंथ साधुओं के जहां चरण पड़ते है वह स्थान भी पवित्र हो जाते हैं। भगवान वही बन पाता है जिनकी सर्वजगत के प्राणी मात्र के कल्याण की भावना तीव्र रहती है। शत्रुता रागद्वेष में होती है पर करुणा प्राणी मात्र की होती है। जिसका तत्व पर अनुशासन है वह समस्त विश्व पर शासन करता है। जिसका स्व पर अनुशासन है वही आत्मानुशासक है और जो आत्मानुशासक होता है वही विश्व के प्राणी मात्र पर अनुशासन करता है। संबंधों में दुख है, स्वभाव में सुख है। जगत के संबंध दुख ही देते हैं जो संबंधों से दृष्टि हटा लेता है वह स्वात्मभूत आत्मद्रव्य स्वभाव को प्राप्त कर लेता है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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