देश के दुर्भाग्य को बदल सकती है गौ सेवा:साध्वी अंजलि

Oct 30 2025

ग्वालियर। आज हमारे देश के युवाओं को डाय के गोबर में से बू आती है और वे कुत्तों को दुलार करते हैं। इस दुर्भाग्य को यदि सौभाग्य में बदलना है तो नौजवानों की सोच को बदलना होगी। उन्हें यह समझना होगा कि गौ सेवा के बल से ही कृष्ण बलशाली बने। उन्होंने कहा कि हमारे घर में यदि कोई धार्मिक या सामाजिक शुभ कार्य होता है तो अपने सभी भाई बंधु और मित्रों को उसमें सहभागिता करना चाहिए क्योंकि धन के बल पर कार्य तो अकेला व्यक्ति भी कर लेता है लेकिन उसमें शोभा नहीं आती।ं
 उन्होंने आज की बढ़ती बेरोजगारी की समस्या को लेकर कहा कि डिग्री लेना ही युवाओं का लक्ष्य हो गया है। वे एक झटके में बड़े बनना चाहते हैं लेकिन जो लोग बड़े बने हैं उनसे जाकर पूछो कि उन्होंने कहां से शुरुआत की और उसके लिए कितना संघर्ष किया। नेक नीयत से यदि कोई भी छोटा कार्य आरंभ किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
 देश के वीर सैनिकों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि सैनिकों की वजह से ही हम सुरक्षित और निर्भीक हैं। प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य की सैनिकों का सम्मान करें जहां से भी सैनिक गुजरे उन्हें प्रणाम करें क्योंकि जो व्यक्ति देश सेवा कर लेता है उसके मन में समाज सेवा का भी भाव जागृत हो जाता है। उन्होंने कहा कि जितना संसार की ओर बढ़ोगे उसके आवरण से घिरते चले जाओगे वहीं यदि ईश्वर की तरफ बढ़ोगे तो मुक्त होते चले जाओगे।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण से हमें हर परिस्थिति में मुस्कुराते हुए रहना सीखना चाहिए। जीवन में कितनी भी कठिनाई आ जाए कभी विचलित नहीं होना चाहिए। देश के कानून को लेकर उन्होंने कहा कि आज भारत देश में आतंकवादियों को भी दंड देने से पहले दया याचिका लगाई जाती है। दुष्टों के मन में डर पैदा करने के लिए हिंदुस्तान में भी अब देश में जैसे कड़े कानून लागू करने होंगे। उन्होंने बताया कि भारत आदिकाल से ही कला और तकनीक में उन्नत रहा है। द्रोपदी के चीर हरण का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्योधन पर द्रोपदी नहीं भीम हंसे थे। गांधारी अपने पुत्रों को द्रोपद्री का अपमान करने से रोक लेती तो महाभारत नहीं होती। जो माताएं अपने बच्चों की गलतियों की ओर से आंख मुंद लेती हैं उनके बच्चे जरूर समाज और राष्ट्र के लिए घातक होते हैं। जुए को सामाजिक बुराई बताते हुए उन्होंने कहा कि धृतराष्ट्र को जुए की लत थी। द्रोपदी द्वारा हारा हुआ सब कुछ वापस दिलवाने के बाद भी धृतराष्ट्र ने दांव लगाया और अपने भाइयों और पत्नी के साथ 12 वर्ष का बनवास पर एक वर्ष का अज्ञातवास भोगना पड़ा।
इस अवसर पर श्रीमती कुंवर पाराशर दिवाकर शर्मा संगीता शर्मा केशव मुनि जितेंद्र सिंह भदोरिया रघुराज सिंह भदोरिया इत्यादि सहित सैकड़ो धर्म प्रेमी एवं राष्ट्रभक्त श्रोता मौजूद रहे।