मानव के लिए सबसे बड़ा राष्ट्रधर्म: साध्वी अंजलि
Oct 24 2025
ग्वालियर। जिस राष्ट्र मेें हमने जन्म लिया है, उसके प्रति समर्पित रहना मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी राष्ट्रधर्म की रक्षा के लिए अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। यह विचार कुरूक्षेत्र से आई साध्वी अंजलि देवी ने शताब्दीपुरम स्थित दंदरौआ धाम में आयोजित हो रही राष्ट्रकथा-कृष्णकथा के शुभारंभ अवसर पर शुक्रवार को कही।
अंजलि देवी ने कहा कि आजकल लोग जातियों में बंटकर राष्ट्र को कमजोर कर रहे हैं। यहां तक की महापुरूषों को भी जातियो में बांट रहे हैं, जो कि बिल्कुल अनुचित है। महापूरूष किसी जाति विशेष का नहीं होता है, वह तो संपूर्ण राष्ट्र के भले के लिए आता है। महापुरूष किसी विशेष जाति के नहीं बल्कि उनके होते हैं जो महापुरूषों के आदर्शों का अनुशरण करते हैं। लेकिन आजकल लोगों को समाज को बांटने की बीमारी लग गई है। समाज को बांटने मेें राजनीति का भी बड़ा योगदान हैं। सिर्फ हिंदुओं के आवेदन में जाति लिखी जाती है, अन्य पंथों में जाति के कॉलम में सिर्फ पंथ लिखा जाता है।
उन्होंने कहा कि रात्रि के अंधकार में तो देखा जा सकता है, लेकिन यदि बुद्धि मेंं अंधकार आ जाए, तो फिर मनुष्य को कुछ भी दिखाई नहीं देता है। ये इतना खतरनाक होता है कि भाई को भाई नजर नहीं आता है। उन्होंने कहा कि जो भी हो उसे मिल बांटकर खाओ। अकेले मेें खाने वाला पाप खाता है। अगर आप स्वार्थी हो जाओगो तो परिवार वाले भी आपसे दूरी बना लेंगे। उन्होंने कहा कि आजकल हर व्यक्ति भाग रहा है, वो कहां पहुंचेगा उसे खुद ही पता नहीं हैं। जिसके जीवन में लक्ष्यहीनता होती है, वो कभी मंजिल पर नहीं पहुंच पाता है। इस अवसर पर श्रीमती कुंअर पाराशर, दिवाकर शर्मा, संगीता शर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, केशव मुनि, निखिल चौैहान, मुकेश शर्मा, अजय शर्मा सहित सैकड़ों राष्ट्रधर्म प्रेमी श्रोता मौजूद रहे।
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