पाठशाल के बच्चो ने दी योग, नृत्य, नाटिका की प्रस्तुतियां, जैन धर्म पर बनाए मॉडल

Oct 13 2025

ग्वालियर। मुरार में चातुर्मास कर रहीं आर्यिका विजय मति माताजी के सानिध्य मे मुरार, सीपी कालोनी ओर मीरा नगर में चल रही आचार्यश्री विद्या सागर संस्कार पाठशाला का वार्षिक विद्योत्सव 2025 का आयोजन  मुरार स्थित जैन धर्मशाला में पाठशाला के 250 बच्चो के द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई। जिसमे योग, नृत्य, नाटिका प्रस्तुति के साथ गायन आदि विधाओं में बच्चों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। पाठशाल के बच्चो के द्वारा जैन धर्म पर मॉडल भी बनाए गए जो कि जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म: पर आधारित थे।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि वार्षिक विद्योत्सव में पाठशाला में अध्ययनरत सभी बच्चों का वार्षिक परीक्षा परिणाम भी घोषित कर पाठशाल के बच्चों को पुरस्कार वितरण किए गए। इस कार्यक्रम में 3 वर्ष से 11 वर्ष तक के बच्चों ने भाग लिया। पाठशाल के बच्चो के द्वारा जैन धर्म पर मॉडल बनकर लाए। यह मॉडल जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म: पर आधारित थे। मॉडल में भक्तामर रचना, गोमतेश्वर के बाहुबली, पावापुरी का मंदिर, बत्तीसी एक्सप्रेस आदि मॉडल डिजाइनिंग और सजावट के साथ आकर्षित लग रहे थे। वही मॉडल में प्रथम, द्वितीय और तृतीय विजेता आने वाले बच्चों को पुरुस्कार दिए।

धर्म के संस्कार न मिलने पर गलत  संगति के रास्ते पर भटक जाते हैं बच्चे: आर्यिकाश्री विजय मति
वार्षिक विद्योत्सव में आर्यिकाश्री विजय मति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन पाठशालाओं का उद्देश्य बच्चों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा देना है ताकि वे संस्कारवान बन सकें। माता-पिता को बच्चों को ऐसी पाठशालाओं से जोडऩा चाहिए और घर में भी अच्छे संस्कार वाला माहौल बनाना चाहिए। संस्कार आज नहीं कल पल्लवित होंगे। बिना मोबाइल के आजकल बच्चे भोजन नहीं करते हैं, तो इन बच्चों को मोबाइल किसने दिया है। जब माता-पिता ही दिन भर मोबाइल चलाएंगे, तो बच्चे कहां पीछे रहने वाले हैं। समाज के कई लोग बच्चों को पाठशाला नहीं भेजते। ऐसे बच्चे जीवनभर भटकते हैं। जैसी संगति होती है, वैसा ही रंग चढ़ता है।