यदि मन में अहंकार या बुरे विचार हैं, तो दान या धर्म करने का कोई लाभ नहीं होता है-आचार्यश्री

Oct 11 2025

ग्वालियर। मन की शक्ति बहुत अपार है और यदि मन को जीत लिया जाए तो असंभव भी संभव हो सकता है। मन की शांति और आनंद के लिए हमें स्वयं पर विश्वास करना चाहिए। यदि मन में अहंकार या बुरे विचार हैं, तो दान या धर्म करने का कोई लाभ नहीं होता है। धर्म का पालन पूरी श्रद्धा, प्रेम और भावना से किया जाना चाहिए, न कि केवल दिखावे या बाध्यता के लिए। हमारा मन यदि धर्म में नहीं लगता है फिर भी हमें धर्म में मन लगाने का प्रयास करते रहना चाहिए। बिना मन से किए गए धर्म का फल नहीं मिलता है। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने शनिवार को रेसकोर्स रोड स्थित केशरबाग अपार्टमेंट में मंगल प्रवेश के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
वही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के चरणों को स्पर्श कर नमोस्तु कर दर्शन के साथ आशीर्वाद लिया। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने आचार्यश्री के संग कुछ दूर तक पद विहार करवाया।
आचार्यश्री ने आगे कहा कि धर्म का अर्थ वर्तमान में कर्मों को बदलकर भविष्य को सुधारना है, और धर्म के रास्ते पर चलकर ही व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर सकता है। धर्म मन और शरीर दोनों की शुद्धि से जुड़ा है, मीठी वाणी, परिवार और समाज के साथ सद्भावनापूर्ण व्यवहार ही सच्चा धर्म है। धर्म व्यक्ति को जीने की सही राह दिखाता है, चाहे वो कैसा भी हो, धर्म ही उसे उसके स्वभाव और मूल्यों से जोड़ता है। हम पर कैसा भी संकट आ जाए, कैसी भी विपत्ति आ जाए, हम अपने धर्म से दूर न हो जाएं, हे भगवन हमें ऐसी शक्ति देना। धर्म की आराधना करने से जीवन पावन व पवित्र हो जाता है। जब सभी रास्ते बंद हो जाते है तब केवल धर्म का सहारा ही रह जाता है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ओर मुनिराज सुबह आदित्यपुरम दिगंबर आदिनाथ जैन मंदिर से पद यात्रा शुरू की। जैन मंदिर सेढोल ताशे के साथ पद यात्रा सचिन तेंदुलकर मार्ग, सिटी सेंटर, रेल्वे स्टेशन रोड होते हुए केशर बागा अपार्टमेंट पहुंचे। जहां केसर अपार्टमेंट के डॉ वीरेंद्र गंगवाल सहित जैन परिवारों ने रंगोली सजाकर आचार्यश्री सुबल सागर महाराज की आगवानी कर उनके चरणों का पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी।