साधु-संत भी संसार के जीवों के कल्याण के लिए ही पृथ्वी पर जन्म लेते हैं-आचार्यश्री
Oct 09 2025
ग्वालियर। आचार्यश्री सुबल सागर महाराज अपने 8 पिच्छी धारी मुनिराज सहित गुरुवार की सुबह थाटीपुर जैन मंदिर से विहार करते हुए सिरौल स्थित आदित्यपुरम में बने नवीन दिगंबर जैन आदिनाथ मंदिर में प्रथम बार बैंड-बाजों के साथ मंगल प्रवेश किया। इस दौरान आचार्यश्री ससंघ का डीबी सिटी के जैन समाज के लोगों ने भक्ति भाव के साथ उनकी भव्य आगवानी की।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ सहित थाटीपुर से विहार कर डीबी सिटी से होते हुए नवीन जैन मंदिर गाजेबाजे के साथ पहुंचे। आचार्यश्री ससंघ का समाजजनों ने जगह-जगह रंगोली सजाकर उनके चरणों का जल से प्रक्षालन कर मंगल आशीर्वाद लिया। इस दौरान आचार्य के साथ 8 पिच्छी धारी संत भी मौजूद रहे। आचार्य श्री ससंघ ने पहले मंदिर पहुंचकर भगवान आदिनाथ के दर्शन किए। नवीन मंदिर में प्रथम बार आचार्यश्री ससंघ के प्रवेश होने पर मंदिर प्रांगण में जय गुरु देव के जयकारें गूंजे।
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार के जीवों का कल्याण करने वाला ही सच्चा और सार्थक जीवन जीता है। जो लोग दूसरों के कल्याण में सहायक होते हैं, उनका जन्म सार्थक होता है, और साधु-संत भी संसार के जीवों के कल्याण के लिए ही पृथ्वी पर जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ी अच्छाई है धर्म को धारण करना। धर्म के बिना ज्ञान प्राप्त करना भार हो जाता है।धर्म संसार के दुखों से निकालकर सुख के सागर की ओर ले जाता है। पापों से दुख और पुण्य से सुख का संचय होता है।धर्म करने वाले का मन हमेशा स्वच्छ होना चाहिए। जिसका मन बच्चे की तरह पवित्र और स्वच्छ होगा उसे ही धर्म का फल मिलेगा। हमें धर्म, साधना, तपस्या, उपवास, स्त्रोतों और ईश्वर से बहुत उम्मीद होती है। पवित्र और स्वच्छ मन से किया गया धर्म हमेशा सुखद फल देता है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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