एक पत्थर भगवान बन जाता है, पर आदमी नहीं बन पाता: आचार्यश्री

Oct 06 2025

ग्वालियर। आचार्यश्री सुबल सागर महाराज का ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश सोमवार को थाठीपुर स्थित दिगंबर गुलाबचंद की बगीची जैन मंदिर में हुआ। जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ की मंगल प्रवेश शोभायात्रा निकाली गई।
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे शिल्पी किसी पत्थर को तराशकर एक सुंदर मूर्ति बनाता है। उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों से अपनी आत्मा को परिष्कृत और संवारना चाहिए, जिससे वह अपनी आत्मा को 'शिल्पी' बना सके। उन्होंने कहा कि एक इंसान को भगवान बना पाना बड़ा कठिन है। एक पत्थर भगवान बन जाता है, पर आदमी नहीं बन पाता, क्या कारण है। कारण स्पष्ट है, जब कोई शिल्पी पत्थर पर कोई छैनी और हथौड़ा चलाता है, तो वह कोई प्रतिकार नहीं करता है, श्रद्धा समर्पण भाव से शिल्पी की हर चोट को सहता है। शिल्पी जितना काटता है, कट जाता है, जितना छीलता है छिल जाता है, जितना मिटाता है, मिट जाता है। वह पाषाण कभी कोई प्रतिकार नहीं करता और न ही खंडित होता है। लेकिन यह इंसान! यदि इस पर कोई जरा सी भी चोट करता है, तो प्रतिकार करता है, उठ खड़ा होता है। यही वजह है कि यह इंसान भगवान नहीं बन पाता। यही कारण कि इंसान के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं हो पाता। जीवन समर्पण मांगता है।