स्वामी आनंद स्वरूप के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, नहीं तो अपनाएंगे आंदोलन का मार्ग

Oct 06 2025

भितरवार। आरक्षण विरोधी स्वामी आनंद स्वरूप ने पिछड़ा वर्ग से आने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के खिलाफ अशोभनीय एवं अमर्यादित भाषा में जो टिप्पणीं की है उसे हम बर्दाश्त नहीं करेगें। समाज में भाईचारा खत्म करने की कोशिश करने वाले स्वामी आनंद स्वरूप के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। अगर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। यह बात बृजेंद्र सिंह रावत ने ज्ञापन देते समय एसडीओपी से कही। 
सोमवार को स्थानीय ओबीसी महासभा के कुछ लोग बृजेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में एसडीओपी कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने एसडीओपी को स्वामी आनंद स्वरूप के विवादित बयान को लेकर एसडीओपी जितेंद्र नगाइच को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने उल्लेख किया कि 2 अक्टूबर को स्वामी आनंद स्वरूप के द्वारा अपने सोशल मीडिया एकाउंट ट्विटर एवं फेसबुक पर पिछड़े वर्ग एवं ओबीसी आरक्षण और पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित विभिन्न दलों के नेताओं के खिलाफ अशोभनीय एवं अमर्यादित भाषा का वीडियो डाला है। जिससे समाज एवं अन्य समुदाय के आपस में लडऩे एवं वर्ग संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। इस तरह उकसाने बाला कृत्य घोर निंदनीय हैं। 
स्वामी ने विवादित टिप्पणी कर समाज में सदभाव और भाईचारे को खत्म करने की कोशिश की है। उनकी इस अशोभनीय,अमर्यादित भाषा से पिछड़े वर्ग में काफी रोष व्याप्त है। वहीं ज्ञापन में बताया कि पूर्व में भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर एवं संविधान के विरुद्ध स्वामी आनंद स्वरूप के द्वारा ग्वालियर में हाईकोर्ट के अंदर बाबा साहब की प्रतिमा लगाए जाने पर अशोभनीय टिप्पणियां एवं दो वर्गों के बीच संघर्ष कराने को लेकर बयान दिए थे। जो राष्ट्रहित में न होकर देश द्रोही की श्रेणी में आता है। 
ज्ञापन में ओबीसी महासभा ने मांग करते हुए कहा कि ओबीसी विरोधी, संविधान विरोधी, पिछड़ा वर्ग दलों के विरोधी स्वामी आनंद स्वरूप के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कृपा करें। अन्यथा ओबीसी वर्ग पूरे मध्य प्रदेश में उग्र आंदोलन को विवश होगा। ज्ञापन देते समय बृजेंद्र रावत, शंकर सिंह गुर्जर, मनोज यादव, पुष्पेंद्र रावत, नरेंद्र रावत, बंटी रावत, नरेंद्र यादव, नरेंद्र सिसोदिया, कल्याण सिंह गुर्जर आदि उपस्थित थे।