अहंकार रहित होना भगवान की सर्वोत्तम भक्ति, श्रीकृष्ण जन्म पर झूमे भक्त

Oct 04 2025

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में भागवताचार्य सतीश कौशिक महाराज ने समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम जन्म, कृष्ण जन्म की कथा स्रद्म श्रवण कराते हुए कहा अमृत बिना मंथन के प्राप्त नहीं हो सकता फिर चाहे वह ज्ञान अमृत हो या स्वर्ग का अमृत। अमरत्व प्राप्त करने के लिए देवताओं और असुरों को मिलकर समुद्र मंथन करना पड़ा तब अमृत की प्राप्ति हुई।
मनुष्य जब सदगुरु के चरणों में बैठकर उनकी आज्ञा अनुसार मन के सत और असत विचारों का मंथन करता है तब ज्ञानामृत की प्राप्ति होती है। स्वर्ग के अमृत से अमरत्व तो प्राप्त हो सकता है लेकिन मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता परन्तु ज्ञान अमृत से जन्म मरण का चक्र समाप्त होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। अर्थात सद्गुरु कृपा से सदा सर्वदा के लिए परमात्मा के चरणों में निवास मिलता है।
कौशिक महाराज ने नवम स्कंध में प्रभु श्रीराम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न के जन्म की कथा सुनाई। दशम स्कंध में कृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कहा मथुरा में राजा कंस के अत्याचारों से जब पृथ्वी त्राहि त्राहि करने लगी तब देवताओं द्वारा स्तुति करने पर भगवान श्री हरि ने देवकी वासुदेव के यहां आठवीं संतान के रूप में कंस के कारागार में जन्म लिया। भगवान की आज्ञा से वासुदेव ने रातों-रात यमुना पार कर गोकुल पहुंचकर मैया यशोदा के यहां बाल कृष्ण को पहुंचाया।
कथा के मुख्य यजमान डॉ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव एवं श्रीमती अलका श्रीवास्तव, रामकुमार,साकेत, डॉ रूपल, डॉ प्रत्युष, डॉ रूपल, संतोष, आयुष, आर्यन, हर्ष नेहा, लक्ष्मी,आस्था, श्रुति, अव्यन श्रीवास्तव ने श्रीमद्भागवत का पूजन कर आरती की।