सत्य ही सृष्टि का आधार: कौशिक महाराज
Oct 03 2025
ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथाव्यास सतीश कौशिक ने संत श्रीशुकदेव का आगमन, मंगलाचरण, परीक्षित चरित्र, ध्रुव चरित्र की कथा श्रवण करते हुए कहा केवल सद्गुरु कृपा से ही चारों पुरुषार्थ धर्म अर्थ काम और मोक्ष एक साथ प्राप्त हो सकते हैं। शौनक ने अपने गुरुदेव सूतजी से छह प्रश्न पूछे, जीव का परम श्रेय (कल्याण) क्या है, शास्त्रों का सार क्या है, संसार के प्राणियों के प्रति करुणा का क्या महत्व है,कल्याण का सरल साधन क्या है, और कलियुग में धर्म और अधर्म का क्या स्वरूप होगा। सूत जी महाराज ने इन प्रश्नों का जो उत्तर दिया वही श्रीमद्भागवत कथा का सार है।
कौशिक महाराज ने कहा सत्य ही सृष्टि का आधार है। परमात्मा भी सत्य स्वरूप ही है सत्य ही सर्वश्रेष्ठ धर्म है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सत्य का पालन अवश्य ही करना चाहिए।सत्य के मार्ग से हटने पर व्यक्ति का निश्चित ही पतन हो जाता है। परीक्षित ने असत्य और अधर्म से अर्जित किए हुए स्वर्ण मुकुट को अपने मस्तक पर धारण किया जिससे उनकी बुद्धि भ्रमित हो गई और उन्होंने तपस्या में रत शमिक ऋषि के गले में मरा हुआ सर्प डालकर अनजाने में उनका अपमान कर दिया। फलस्वरूप उन्हें सात दिन के भीतर तक्षक नाग द्वारा डसे जाने का भयंकर श्राप झेलना पड़ा।
राजा परीक्षित परम भगवतभक्त थे इसलिए अवधूत सन्त शुकदेव महाराज ने उन पर कृपा कर श्रीमद्भागवत कथा सुनाकर सात दिन के भीतर मोक्ष प्रदान कर उनका परम कल्याण किया।
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