भरत मिलाप त्याग और प्रेम का अद्भुत उदाहरण: मंगलेश्वरी देवी
Oct 03 2025
ग्वालियर। संगीतमय श्रीरामकथा के सप्तम दिवस का पावन प्रसंग केवट प्रसंग एवं भरत मिलाप रहा। विहवल सेंगर ने बताया कि कथा में भक्तों ने केवट प्रसंग से सद्गुरु की महिमा और भरत मिलाप से प्रेम व त्याग का अमूल्य संदेश आत्मसात किया। जेल रोड स्थित दुर्गा विहार कॉलोनी में स्थापित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही संगीतमय श्रीराम कथा में साध्वी मंगलेश्वरी देवी ने केवट प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान केवल केवट की नाव में ही बैठना चाहते हैं। क्योंकि केवट मात्र भक्त ही नहीं, अपितु करनधार सद्गुरु दृढ़ नावा के रूप में गोस्वामी तुलसीदास ने उसकी उपमा दी है। जैसे भवसागर से पार वही कराता है जो सच्चा सद्गुरु होता है, वैसे ही प्रभु राम जीवात्मा रूप में केवट (सद्गुरु) से भवसागर पार कराने की विनती करते हैं। चरण धोने का प्रसंग भी यही संदेश देता है कि सद्गुरु शिष्य के जीवन की शुद्धता और आचरण सुधार के बिना मुक्ति नहीं देते। भरत मिलाप के प्रसंग पर साध्वी ने कहा कि भरत जी व्यक्ति मात्र नहीं, बल्कि भगवान राम का परम प्रेम स्वरूप धारण कर अवतरित हुए हैं। उनका त्याग राम जी से भी श्रेष्ठ है। श्रीराम वनवासी जीवन इसलिए जी सके क्योंकि उनके पास वैभव और विलासिता के साधन नहीं थे, परंतु भरत जी तो अयोध्या के राजमहल में रहते हुए भी सर्वस्व त्याग कर प्रभु के चरणों में समर्पित रहे।
कथा में मनीष भागवत, सहदेव पाराशर, अनूप, श्रीमती अनीता सत्येंद्र तोमर, श्रीमती कृष्णा गजेंद्र सेंगर, श्रीमती शकुंतला विहवल सेंगर, श्रीमती सोनी अवधेश शर्मा, श्रीमती किरण लक्ष्मण भदोरिया, श्रीमती कौशल्या सिरोमन तोमर, श्रीमती सावित्री अमर सिंह सेंगर, श्रीमती उषा रिपसूदन रजक, श्रीमती किरण नाहर सिंह, श्रीमती माया तोमर, श्रीमती सुधा जादोन, श्रीमती संगीता ठाकुर, ओपी दंडोतिया, श्रीमती मुन्नी देवी भदोरिया, श्रीमती मनोरमा भदोरिया, श्रीमती दीपा तिवारी, सुरेंद्र पाल सिंह राजावत, कमलेश शर्मा, वीरेंद्र तोमर, छत्रपाल भदोरिया आदि उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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