हमारे जीवन में धर्म की भावना बढऩी चाहिए:आचार्यश्री
Oct 02 2025
ग्वालियर। आचार्यश्री सुबल सागर महाराज का ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश गुरुवार को मुरार स्थित दिगंबर पंचायती बड़ा जैन मंदिर में सकल जैन समाज के द्वारा बैड बाजों के साथ करवाया। आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ कील गेट से मुरार जैन मंदिर तक पाद यात्रा करते हुए पहुंचे।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ की मंगल प्रवेश शोभायात्रा निकाली गई। यह मंगल प्रवेश मुरार के जैन समाज के लोगो आचार्यश्री सुबल सागर महाराज की आगवानी के साथ नाचते झूमते हुए की। आचार्यश्री के जगह जगह जैन समाज के लोगो ने रंगोली सजाकर उनके चरणों का जल से पाद प्रक्षालन कर मंगल दीपकों से आरती उतारकर आशिर्वाद लिया।
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सम्पूर्ण जगत में इस धर्म के समान कोई पवित्र वस्तु नहीं है। हमारे जीवन में धर्म की भावना बढऩी चाहिए। धर्म वस्तु या पदार्थ का स्वभाव है, जो उसमें स्वाभाविक रूप से विद्यमान रहता है। जैसे पानी का धर्म है बहना, और अग्नि का धर्म है जलना और प्रकाश देना। जैन दर्शन के अनुसार, हर वस्तु के स्वभाव को धर्म कहते हैं और यह धारण करने योग्य है। विस्तृत अर्थ में धर्म धारण करने योग्य गुण भी है जो व्यक्ति या समाज को धारण करता है। इस मौके पर मंदिर अध्यक्ष दिनेश जैन, सुभाष जैन, वीरेंद्र जैन, विकास जैन आदि मौजूद थे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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