लक्ष्मण को शक्ति लगी, हनुमानजी संजीवनी लेकर पहुंचे
Oct 02 2025
ग्वालियर। रामलीला में अंगद का सुझाव रावण ने नहीं माना तो राम ने लंका पर चढाई करने का फैसला किया। सुग्रीव ने अपनी सेना को युद्ध के लिए. तैयार किया और रावण ने अपने प्रिय पुत्र मेघनाथ को युद्ध करने के लिए भेजा। लक्ष्मण और मेघनाथ के मध्य भयंकर युद्ध होता है। मेघनाथ अपनी मायावी शक्तियों से लक्ष्मण पर प्रहार करता है। लक्ष्मण भी वीरता के साथ मेघनाथ से युद्ध करते है।
मेघनाथ को जब लगता है कि वह लक्ष्मण को नहीं हरा पाएगा तो वह गायब हो जाता है और छल से शक्ति का प्रहार करता है जो कि लक्ष्मण को मूक्षित कर देती है। लक्ष्मण धरा पर गिर जाते है और मेघनाथ लक्ष्मण को उठाना चाहता है लेकिन वह उठा नहीं पाते। तब हनुमान जी लक्ष्मण को उठाकर राम दल में ले आते है। राम की सेना में हाहाकार मच जाता है। राम जी लक्ष्मण को मूक्षित हालत में देखकर दुखी होते है और लक्ष्मण को ठीक करने के लिए अपने दल से पूछते है। तब विभीषण बताते है कि आप हनुमान को शीघ्र लंका भेजिए और वहां से सुषेन वैध को ले आए वे ही कुछ कर सकते है। हनुमान शीघ्र लंका जाकर सुषेन वैध को ले आते है। वे लक्ष्मण को देखकर बताते है कि यदि सूर्योदय से पहले हिमालय से संजीवनी बूटी आ जाए तो लक्ष्मण के प्राण बच सकते है। हनुमान शीघ्र ही हिमालय की ओर चल पडते है। रावण को जब पता चलता है कि हनुमान हिमालय से संजीवनी बूटी लेने गया है तो वह कालनेमी को हनुमान की रास्ता रोकने के लिए भेजता है। कालनेमी साधू का रूप रखकर हनुमान को रोकने का प्रयास करते है लेकिन हनुमान जी को पता चल जाता है कि कालनेमी रूप बदलकर उनका समय नष्ट करना चाहता है। हनुमान जी कालनेमी का वध कर हिमालय पर पहुचते है लेकिन संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाते तब वे पूरे पहाड़ को उठा कर राम दल की चल पडते है।
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