आपका जीवन धर्म ओर धर्म के संस्कारों से जुड़ा है तो आपका जीवन श्रेष्ठ है-आचार्यश्री
Sep 30 2025
ग्वालियर। अगर आपका जीवन धर्म ओर धर्म के संस्कारों से जुड़ा है तो आपका जीवन श्रेष्ठता की ओर बढ़ता चल जाएगा। जिदंगी में किसी से कहना नहीं पड़ेगा बल्कि लोग तुम्हारे स्वयं सहयोगी बनेंगे और अगर तुम्हारा जीवन धर्म से नहीं जुड़ा तो सहयोगी करने वाले भी आपको छोडक़र चले जाएंगे। आपकी पहचान धर्म से हे आप अगर प्रतिदिन मंदिर में पूजा, स्वाध्याय आदि क्रियाएं करते हो सामने वाला व्यक्ति आपकी परेशानी को दूर करने का प्रयास करेगा, यदि आप पूजा, मंदिर, स्वाध्याय नहीं करते तो आपकी पहचान, आपका व्यवहार देखकर कोई भी मदद नहीं करेगा। यह विचार आचार्य श्री सुबल सागर महाराज ने मंगलवार को उपनगर लोहा मंडी स्थित दिगंबर लाला गोकुल चंद्र जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि अगर जैन नाम लिखने से क्या होता है, नाम से नही कर्म से जैन बनो। अगर तुम कर्म के जैन बन जाओगे तो जीवन में कोई भी बड़ी से लेकर छोटी तक कोई परेशानी आपकी जिदंगी में नहीं आएगी। आप धर्म के अमूल्य संस्कारों को अपने परिवार के हर सदस्य को देना चाहिए। जीवन में धन,दौलत, मकान, ज्यजाद ये कुछ नहीं जाएगा केवल धर्म संस्कार की कुंजी ही आपके साथ जाएंगी। धर्म से जीवन अच्छा बनाता है। धर्म से ही जीवन का विकास होता है। धर्म के प्रति श्रध्दा कूट कूट के होनी चाहिए। हम जैन हैं हमारे जहां हिंसा, झूठ, चोरी, कुशल और परिग्रह आदि को धर्म में नहीं बताया गया हैं।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज विगत दिवस ग्वालियर नगर के अलग अलग जैन जिनालयों में पहुंचकर 11 नवंबर से शुरू होने वाले जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव में समाज को जुडऩे के उदेश के लिए होगा।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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