धर्म के मार्ग और पुण्य संचय के साधन को कभी भी नहीं छोडऩा चाहिए-आचार्यश्री

Sep 29 2025

ग्वालियर। श्री दिगंबर जैन मंदिर नसिया भगवान शांतिनाथ मार्ग (गेंडेवाली सडक़) पर जैन धर्म की प्राचीन 22 फुट ऊंची उतंग, खड्गासन प्रतिमा ाांतिनाथ भगवान के दरबार में सोमवार को आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सान्निध्य में वार्षिक मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक किया। वही जैन मेले में कई प्रतियोगिताओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म के मार्ग और पुण्य संचय के साधन को कभी भी नहीं छोडऩा चाहिए। मनुष्य जन्म की अगर नैया पार इन्हीं दोनों मार्गों एवं साधनों से हो सकती है। धर्म का मार्ग और पुण्य संचय के साधन एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं, क्योंकि जो व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलेगा, वह पुण्य के कार्य भी करता है और पुण्य के साधनों का संचय करता है। इंसान कई तरह के पुण्य का संचय कर सकता है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि वार्षिक मेले के दौरान महिलाए, बच्चे और पुरुषों  ने जमकर हाऊजी सरप्राईज गेम, आकर्षण गेम, प्रश्न मंच, आदि प्रतियोगिता खेली। वही प्रतियोगिता में विजय आने वालों को पुरूस्कार देकर सम्मानित किया।