शिव धनुष टूटा, श्रीराम और सीता की जयमाला हुई

Sep 26 2025

ग्वालियर। श्री रामलीला समारोह समिति द्वारा आयोजित रामलीला में मिथला नरेश राजा जनक सीता का स्वयंवर अपने दरबार में आयोजित करते है। दूर-दूर प्रदेशों के बलशाली राजा स्वंयवर में शामिल होते है। मुनि विश्वामित्र के साथ श्रीराम-लक्ष्मण भी स्वयंवर में पहुचते है। दरबार में राजा जनक घोषणा करते है कि जो राजा शिव धनुष को तोडेगा उसी के साथ सीता का विवाह होगा। रावण भी इस स्वयंवर में आता है तथा वाणासुर के साथ उसका संवाद होता है। वह प्रतिज्ञा कर बापिस चला जाता है कि एक दिन सीता को अवश्य लंका ले जायेगा।
अति बलशाली राजा एक-एक करके शिव धनुष को उठाने का प्रयास करते है। लेकिन वे शिवधनुष को एक इंच हिला भी नहीं पाते। जिससे राजा जनक दुखी होते है तथा कहते है कि लगता है पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। लक्ष्मण राजा जनक पर क्रोधित हो जाते है वे कहते है जहां रघुकुल शिरोमणि श्रीराम बैठे हो वहां पृथ्वी वीरों से कैसे खाली हो सकती है। यदि श्रीराम मुझे आज्ञा दे तो ये शिव धनुश तो क्या मै पूरे ब्रमाण्ड को गेद की तरह उछालकर ऐसे पटकू कि उसके टुकडे हो जाऐगे। गुरू की आज्ञा पाकर श्रीराम शिवधनुष का भंजन करते है।
श्रीराम द्वारा शिवधनुष तोडने पर रामलीला मैदान में हर्षोउल्लास के साथ बनाया गया इस अवसर पर आतिशवाजी रामलीला मैदान में की गई। 15 फुट ऊंचे घूमते हुए स्टेज पर श्रीराम और सीता की जयमाला की कार्यक्रम का विषेष आकर्षण रहा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने  रामलीला में भगवान राम की आरती उतारी और रामलीला का आनंद उठाया।