सुख में सब साथ आते है लेकिन दु:ख में कोई नहीं-आचार्यश्री
Sep 25 2025
ग्वालियर। हमेशा याद रखे सुख में सब साथ आते है लेकिन दु:ख में कोई साथ नहीं होता। पुण्य जब तक पास में होता है हर कोई साथ देता है लेकिन जब पाप उदय में आए तो साथ चलने वाले भी छोड़ जाते है। कर्मो का भुगतान तो करना ही होता है उससे हमे देवता भी नहीं बचा पाते है। हमे हमेशा पाप करने से डर लगना चाहिए न कि पाप करने पर मिलने वाली सजा से डरना चाहिए पर हम पाप से नहीं उससे मिलने वाली सजा से डरते है। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने गुरूवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा किहम नफरत व घृणा पाप से करनी चाहिए पर हम पाप करने से वाले ऐसा करते है। आज का पापी कल धर्मात्मा हो सकता फिर उससे घृणा करके क्या मिल जाएगा। एक गलत कर्म की कितनी बड़ी सजा मिलेगी कोई नहीं जानता। क्रोध, अभिमान, माया व लोभ से गलत कर्म तो हो जाते पर जब इनका भुगतान करना पड़ता है तो स्थिति बड़ी विकट हो जाती है।मन को सही रखने के लिए संयम जरुरी है। मन की इच्छाओं का शमन संयम से ही होगा। मन को सुखी बनाने और संतुष्ट करने के लिए जो उचित हो, वही करना चाहिए। बच्चों को माता-पिता टोकते हैं, रोकते हैं तो वह संयमित और सुरक्षित रखने के लिए करते हैं। हमेशा अपने बड़ों की बात मानना चाहिए। नियम ही सुरक्षित रखने के लिए बनते हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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