हमारा आचरण, व्यवहार और क्रिया परमात्मा की आज्ञा के अनुरूप होना चाहिए-आचार्यश्री

Sep 20 2025

ग्वालियर। शरीर के साथ मन जुड़ा हुआ है जो हमें नरक में भी ले जा सकता है और उत्तम गति में भी पहुंचा सकता है। शरीर हमारा सिर्फ श्मशान तक ही साथ दे पाएगा ओर मन को हमें आत्मा से जोडऩा है। धर्म की सच्ची परिभाषा के संदर्भ में परमात्मा की आज्ञा ही धर्म है। हमारा आचरण, व्यवहार और क्रिया परमात्मा की आज्ञा के अनुरूप होना चाहिए। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने शनिवार को चंपाबाग धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि हम जैसा अन्न ग्रहण करेंगे, वैसा ही हमारा मन होगा। शरीर में रही हुई बीमारियां हमें यही बताती हैं कि शरीर अलग है और हमारी आत्मा अलग है, हमें अपने आत्म भावों में ही रमण करना है।शरीर के प्रति हमारी आसक्ति कम होगी तो हमारा आत्मबल पुष्ट होगा और मन में वैराग्य पैदा होगा। हमारी सम्पत्ति भी हमारे घर तक ही साथ चलेगी। हमारी आत्मा के साथ हमारी साधना ही चलेगी। परिवार और रिश्तेदार भी हमारे साथ सिर्फ श्मशान तक ही चलेंगे। एक आत्मा ही है जो कल भी हमारी थी, आज भी हमारी है और मोक्ष प्राप्ति तक हमारी ही रहेगी और वही हमारे साथ चलेगी।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास स्थल जिन सहस्त्रनाम विधान में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का कलशों से अभिषेक जैन समाज के लोगो ने इंद्र बनकर जयकारों के साथ किया।