आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के 49 वें अवतरण दिवस पर हुआ नाटिका मंचन
Sep 15 2025
ग्वालियर। नेमीनाथ जैन मिलन बालिका एवं महिला शाखा की ओर से आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के 49वें अवतरण दिवस पर बालिकाओं एवं महिलाओं द्वारा विवेक से सुबल तक का सफर भक्तिमय नाटिका का मंचन किया गया। यह आयोजन नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में सन्मति सुबल वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज के निर्देशन में किया गया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि जैन मिलन महिलाओ ओर बालिकाओं ने विवेक से सुबल तक का सागर पर आधारित नृत्य नाटिका की मनमोहक प्रस्तुति दी। नाटिका में बताया कि भिंड नगर में 14 सितम्बर 1976 में मां प्रभादेवी की कोख से जन्मे विवेक के आने से घर में परिवार खुशियों से झूमा उठा। विवेक धीरे धीरे बड़े हुए उनके पिता वीरेंद्र जैन हमेश उनको अपने साथ मंदिर ले जाते ओर प्रभु दर्शन कसता मुनिराजों के भी दर्शन करने के साथ धर्म संस्कार की शिक्षा देते। विवेक लौकिक शिक्षा बी. ए पढऩे के साथ धार्मिक ज्ञान की शिक्षा ग्रहण करते थे।
जैसे तैसे बड़े हुए धर्म में रुचि बढ़ती गई। उन्होंने ने परिवार को बिना बताए सन 1997 में आर्यिका सरस्वती माताजी से ब्रह्मचर्य व्रत नियम ग्रहण कर लिया। घर वाले विवेक की शादी की बात चल रहे थे तभी विवेक ने बताया कि मैने ब्रह्मचर्य व्रत ले लिया है मैं शादी नहीं करूंगा।
धीरे धीरे संयम पालन करते करते 7 दिसम्बर 2010 कोल्हापुर (महा.) में विवेक ने मुनि दीक्षा अपने गुरु तपस्वी सम्राट आचार्यश्री 108 सन्मति सागर महाराज से ग्रहण की। तभी से विवेक से आचार्यश्री सुबल सागर का सफर मोक्ष मार्ग तक नाटक मंचन के माध्यम से दर्शाया गया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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