भगवान की भक्ति से ही कलयुग में प्राणी भव से पार हो जाता है:रसराज मृदुल

Sep 14 2025

ग्वालियर। माधव मंगलम गार्डन में चल रही भागवत कथा के छठे दिन  भागवताचार्य रसराज मृदुल महाराज ने कहा कि भगवान की कथा मन को पवित्र आत्मा को गर्वित और चरित्र को निर्मल कर देती है। जैसे-जैसे हम भगवान की कथा को सुनते चले जाते हैं वैसे-वैसे वह हमारे मन की सफाई करती चली जाती है कथा मन को प्रसन्न करती है और चित्त को शांत करती है। महाराज ने कहा भागवत कथा विवेक को जागृत कर देती है नियमित कथा का श्रवण एवं मनन करने वाला व्यक्ति गलत काम कर ही नहीं सकता है ।उन्होंने कहा हमें सदा ऐसा आचरण करना चाहिए कि हमारे व्यवहार और वाणी से किसी को दुख न पहुंचे उन्होंने कहा कि भगवान ने जब रास किया तो जितनी रूपियां थी भगवान उतने ही स्वरुप में प्रकट हो गए। 
व्यास पीठ से महाराज ने कहाभक्त वत्सल भगवान भक्तों के उद्धार के लिए अवतार लेते हैं और अपनी लीला रचाते हैं हमें परमात्मा के सिमरन को कभी नहीं भूलना चाहिए उन्होंने कंस वध की लीला बताते हुए कहा की मथुरा के राजा कंस द्वारा अक्रूर को भगवान कृष्ण और बलराम को मथुरा लाने के लिए भेजा अक्रूर जब नंद बाबा के यहां पहुंचे तो गोपी ग्वालो सखियों ने रास्ता रोक लिया सब बृजवासी रूदन करने लगे भगवान ने उन्हें सांत्वना दी और मथुरा के लिए रवाना हुए।
 उसके बाद मथुरा में प्रवेश करते ही जगह-जगह भगवान का स्वागत हुआ कुब्जा से भेंट हुई तथा अत्याचारी कंस का वध उद्धार किया तथा महाराज उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाया। महाराज ने कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा की रुक्मणी मन ही मन भगवान कृष्ण को अपना पति स्वीकार कर चुकी थी। लेकिन रुक्मणी को भगवान तक पहुंचना दुर्लभ था रुक्मणी देखा कि हमारे पिता और भाई शिशुपाल से शादी करने के लिए तैयार हो रहे हैं तो उन्होंने एक पंडित के माध्यम से भगवान कृष्ण को पत्र भेजा और अंत में लिख दिया यदि आप नहीं आए तो हम अपने प्राण त्याग दूंगी। भगवान कृष्ण के प्रति अतुल श्रद्धा और प्रेम देखकर भगवान रथ पर सवार होकर रुक्मणी के पास पहुंचे रुक्मणी जैसे ही गौरी पूजन को आती है वैसे ही भगवान उनका हरण कर ले जाते हैं और फिर धूमधाम से मथुरा में उनका विवाह होता है।
आज की कथा में पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप शर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने कथा का श्रवण कर महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।