क्षमा केवल एक गुण नहीं है, यह आत्मा के विकास का पहला चरण है-आचार्यश्री

Sep 08 2025

ग्वालियर। उत्तम क्षमा यह केवल एक गुण नहीं है, यह आत्मा के विकास का पहला चरण है। जब हम दश धर्म की बात करते हैं तो सबसे पहले आता है उत्तम क्षमा। इसका कारण यही है कि जब तक हमारे भीतर क्षमा का भाव नहीं है, तब तक बाकी धर्मों की साधना अधूरी ही रह जाती है। क्षमा केवल एक क्रिया नहीं है यह एक भावना है, जो आत्मा को हल्का करती है। जिसके मन में क्षमा का भाव है, उसके भीतर कोई द्वेष नहीं टिक सकता, कोई बैर नहीं ठहर सकता। जीवन में हमसे अनेक बार, अनेक लोगों से टकराव हो जाता है विचारों से व्यवहार से शब्दों से। यह विचार आचार्य श्री सुबल सागर महाराज ने सोमवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में क्षमावाणी पर्व पर मंगल प्रवचन देते हुए व्यक्त किए। 
आचार्यश्री ने कहा कि कभी दूसरों से भूल होती है, तो कभी हमसे। पर जो व्यक्ति हर परिस्थिति में मैं क्षमा देता हूं और मैं क्षमा मांगता हूं कह सकता है, वही वास्तव में उत्तम क्षमा को समझता है। उत्तम क्षमा का मतलब है किसी के दोष को पकडक़र नहीं बैठना, किसी की गलती को अपने भीतर बोझ बनाकर नहीं रखना और न ही अपने अहंकार को क्षमा के रास्ते में आने देना। यह क्षमा शर्तों पर आधारित नहीं होती-अगर वह माफी मांगेगा, तभी मैं क्षमा करूंगा।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज, मुनिराजों ओर क्षुल्लकश्री महाराज से जैन समाज के पुरुष, महिला बच्चे सहित समाजजनों ने हाथ जोडक़र धोख देकर क्षमा याचना की।  
जैन समाज की सामूहिक क्षमावाणी आज, सिंधिया होगें अतिथि
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य एवं सन्मति सुबल वर्षायोग समिति ओर सकल जैन समाज ग्वालियर के आतिथ्य में 9 सितंबर को दोपहर 3 बजे से नई सडक़ स्थित चंपाबाग बगीची में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपस्थिति में सकल जैन समाज की सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। क्षमावाणी कार्यक्रम में व्रतधारियों का सम्मान समारोह आचार्यश्री के ससंघ के सानिध्य में किया जाएगा।