दशलक्षण पर्व पर शिवार्थियो ने की उत्तम अंकिचन धर्म की पूजा

Sep 05 2025

ग्वालियर। सन्मति सुबल मंगल वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज की ओर से चल रहे पर्यूषण पर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान चंपाबाग महिला मंडल की ओर से अष्टभय निवारक महाकाव्य भक्तामर की महिमा ओर आओ चले पाठशाला (बालक, बालिकाओं एवं महिलाओं द्वारा भक्तिमय प्रस्तुति भव्य नृत्य नाटिका का मंचन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में किया गया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि चंपाबाग महिला मंडल की ओर से आओ चले पाठशाला बालक बालिकाओं एवं महिलाओं द्वारा भक्तिमय प्रस्तुति के साथ मंडल की महिलाओं ने अष्टभय निवारक महाकाव्य भक्तामर की महिमा पर आधारित नृत्य नाटिका की मनमोहक प्रस्तुति दी। नाटिका का शुभारंभ भक्ति नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण के द्वारा किया गया। चंपाबाग महिला मंडल की लगभग 25 महिलाओं के द्वारा नाटिका से बताया कि भक्तामर स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंग द्वारा की गई थी। इसका वाचन व अध्ययन मानव जीवन के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। भक्तामर स्तोत्र हमें सिखाता है। धर्म के मार्ग पर चलकर सिखाता है। नाटिका में भक्तामर स्त्रोत्र पर नृत्य कर चलचित्र के माध्यम से दर्शन कराए गया। आयोजन में समाज के लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रही।  
उत्तम आकिंचन का मतलब सुई के बराबर भी परिग्रह न होना-आचार्यश्री
पर्यूषण महापर्व के नौवें दिन शुक्रवार को आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने उत्तम आंकिचन पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तम आकिंचन का मतलब सुई के बराबर भी परिग्रह न होना है। साथ ही मन, वचन और काय से अंतरंग एवं बाह्य परिग्रह का त्याग करना है। पांच पापों, सप्त व्यसनों और पच्चीस कषायों केे त्याग किए बिना उत्तम आकिंचन धर्म आ नहीं सकता। श्रावक भी नियमों एवं व्रतों को धारण कर उत्तम आकिंचन धर्म प्राप्त को प्राप्त कर सकता है। अपने जीवन में धन, मकान, जायदाद, आभूषणों आदि का एक सीमा तक संग्रह का नियम लें। इससे आकिंचन धर्म का पालन हो सकेगा।