त्याग एक ऐसा धर्म है जिसके बिना हमारा जीवन कष्टमय हो जाता है-आचार्यश्री
Sep 04 2025
ग्वालियर। पर्यूषण महापर्व पर सन्मति सुबल वर्षायोग समिति तथा सकल जैन समाज के तत्वावधान में आध्यात्मिक श्रावक साधना शिविर में आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में गुरुवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में उत्तम त्याग धर्म की शिवार्थियो ने दशलक्षण विधान में पूजन किया। वही ग्वालियर चम्बल संभाग के आईजी आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के दर्शनों के लिए पहुंचे। वही शाम को जैन मिलन महिला नेमीनाथ की ओर से सांस्कृतिक धार्मिक अंताक्षरी हुई।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि ग्वालियर चम्बल संभाग के आईजी सुनील कुमार जैन मुख्य अतिथि बनकर गुरुदेव आचार्य सुबल सागर महाराज ससंघ के चरणों में श्रीफल भेंटकर मगंल आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्य अतिथि आईजी सुनील जैन का दुपट्टा माला ओर स्मृतिचिन्ह से सम्मान चतुर्मास समिति द्वारा किया गया। वही 5 सितंबर शुकवार को नौवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म की पूजन आराधना होगी।
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने उत्तम त्याग पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि त्याग का संस्कार हमें प्रकृति से ही मिलाता है। लौकिक जीवन हो या धार्मिक बिना त्याग के कुछ भी नहीं मिलता। बाजार से सामान खरीदने पर धन का समय का श्रमादी का त्याग करना पड़ता है। वैसे ही आत्मिक निर्मलता पाने के लिए त्याग अनिवार्य है। त्याग करने के पहले मान का त्याग करना आवश्यक है। त्याग के बाद अभिमान और आसक्ति नहीं होना चाहिए। त्याग में सुख है, राग में दु:ख है। इसलिए हमें त्याग धर्म को सुनकर कुछ न कुछ त्याग करने का विचार करना चाहिए।त्याग में ही सच्चा सुख है, इसलिए हमें त्याग धर्म को स्वीकारना चाहिए। त्याग हमारी आत्मा को स्वस्थ और सुंदर बनाता है जिसको धारण करने पर सुख मिलता है। त्याग एक ऐसा धर्म है जिसके बिना हमारा जीवन कष्टमय हो जाता है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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