कृष्ण रुक्मणी विवाह के प्रसंग पर झूम कर नाचे श्रद्धालु

Sep 02 2025

ग्वालियर। जीबायएमसी मैदान में चल रही भागवत कथा के छठे दिन भागवताचार्य दिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान की कथा मन को पवित्र आत्मा को गर्वित और चरित्र को निर्मल कर देती है। जैसे-जैसे हम भगवान की कथा को सुनते चले जाते हैं। वैसे-वैसे वह हमारे मन की सफाई करती चली जाती है कथा मन को प्रसन्न करती है और चित्त को शांत करती है। महाराज ने कहा भागवत कथा विवेक को जागृत कर देती है नियमित कथा का श्रवण एवं मनन करने वाला व्यक्ति गलत काम कर ही नहीं सकता है। उन्होंने कहा हमें सदा ऐसा आचरण करना चाहिए कि हमारे व्यवहार और वाणी से किसी को दुख न पहुंचे उन्होंने कहा कि भगवान ने जब रास किया तो जितनी रूपियां थी भगवान उतने ही स्वरुप में प्रकट हो गए। 
उन्होंने कंस वध की लीला बताते हुए कहा की मथुरा के राजा कंस द्वारा अक्रूर को भगवान कृष्ण और बलराम को मथुरा लाने के लिए भेजा अक्रूर जब नंद बाबा के यहां पहुंचे तो गोपी ग्वालो सखियों ने रास्ता रोक लिया सब बृजवासी रूदन करने लगे भगवान ने उन्हें सांत्वना दी और मथुरा के लिए रवाना हुए। उसके बाद मथुरा में प्रवेश करते ही जगह-जगह भगवान का स्वागत हुआ कुब्जा से भेंट हुई तथा अत्याचारी कंस का वध कर उद्धार किया तथा महाराज उग्रसेन को मथुरा का राजा बना दिया। 
महाराज ने कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा की रुक्मणी मन ही मन भगवान कृष्ण को अपना पति स्वीकार कर चुकी थी लेकिन रुक्मणी को भगवान तक पहुंचना दुर्लभ था रुक्मणी देखा कि हमारे पिता और भाई शिशुपाल से शादी करने के लिए तैयार हो रहे हैं तो उन्होंने एक पंडित के माध्यम से भगवान कृष्ण को पत्र भेजा और अंत में लिख दिया यदि आप नहीं आए तो हम अपने प्राण त्याग दूंगी भगवान कृष्ण के प्रति अतुल श्रद्धा और प्रेम देखकर भगवान रथ पर सवार होकर रुक्मणी जी के पास पहुंचे रुक्मणी जी जैसे ही गौरी पूजन को आती है वैसे ही भगवान उनका हरण कर ले जाते हैं और फिर धूमधाम से मथुरा में उनका विवाह होता है।
आज की कथा में भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया, वार्ड 32 के पार्षद हरिबाबू शिवहरे सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने कथा का श्रवण कर महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया आज की कथा समापन पर परीक्षित श्रीमती शकुंतला श्रीमती ज्योति अनिल ममता अनूप शिवहरे एडवोकेट श्रीमती लक्ष्मी रिंकेश श्रीमती रीना नरेंद्र श्रीमती प्रियंका अंकित श्रीमती सुनीता शिवकुमार श्रीमती अर्चना धर्मेंद्र शिवहरे आदि सभी भक्तगणों ने कृष्ण रुक्मणी की आरती उतारी आरती के उपरांत प्रसादी वितरण किया गया।