गल्र्स ग्रीवेंस एंड जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल में हुआ पैनल डिस्कशन

Sep 02 2025

ग्वालियर। एमआईटीएस कॉलेज में गल्र्स ग्रीवेंस एंड जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल के तत्वावधान में एक सशक्त एवं विचारोत्तेजक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया। चर्चा का विषय था पावर शिफ्ट क्या पारंपरिक मर्दानगी खतरे में है?। इस अवसर पर भारी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया और सभी ब्रांचेस के विद्यार्थियों ने अपने विचार बेबाकी, गंभीरता और तार्किकता के साथ प्रस्तुत किए।
संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश मौर्य ने बताया कि कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने हेतु सेल की समन्वयक डॉ. अंशु चतुर्वेदी, डॉ. पारुल सक्सेना, डॉ. सपना कुमारी, डॉ. करुणा मरकाम, डॉ. आरज़ू चौबे, डॉ. भावना राठौर एवं डॉ. नीलम शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनके मार्गदर्शन एवं क्लास कोऑर्डिनेटर्स के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत जेंडर चैंपियन्स द्वारा की गई, जिन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों को गर्ल्स ग्रीवेंस एंड जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल के उद्देश्य, इसकी आइडियोलॉजी तथा मोटो ऑफ वर्क से परिचित कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सेल विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा मंच है जहाँ वे जेंडर सेंसिटिविटी, इक्वैलिटी और वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर संवाद स्थापित कर सकते हैं। सेल का उद्देश्य केवल समस्याओं का समाधान करना नहीं है, बल्कि जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक बदलाव की दिशा में सामूहिक प्रयास को प्रोत्साहित करना है।
इसके उपरांत विद्यार्थियों ने विषय "पावर शिफ्ट : क्या पारंपरिक मर्दानगी खतरे में है?" पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बदलते समय में सामाजिक पावर शिफ्ट पारंपरिक धारणाओं को चुनौती दे रहा है। चर्चा में यह भी सामने आया कि महिलाओं को दिए जा रहे ऑपरच्युनिटीज को लेकर समाज में स्वीकार्यता की स्थिति हर जगह समान नहीं है, कहीं प्रोत्साहन और समर्थन मिलता है, तो कहीं अब भी प्रतिरोध और संकोच का वातावरण दिखाई देता है।
 कार्यक्रम के अंत में जेंडर चैंपियन्स ने कहा कि ऐसे पैनल डिस्कशंस विद्यार्थियों को अपने विचार निडर होकर रखने का अवसर देते हैं और संवाद के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की राह प्रशस्त करते हैं।