इंद्र के घमंड को तोडऩे के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया लगे 56 भोग
Sep 01 2025
ग्वालियर। जीवायएमसी मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन भागवताचार्य दिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि जब वृंदावन वासियों ने भगवान कृष्ण के कहने पर इंद्र की पूजा करना बंद कर दिया। तब इंद्र ने लगातार बारिश की बारिश से बचने के लिए भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा लिया।
महाराज ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तृत वर्णन करते हुए बताया कि श्री कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था लेकिन कंस से बचने के लिए उन्हें वासुदेव ने गोकुल में यशोदा और नंद के पास पहुंचा दिया। जहां उन्होंने बालपन बिताया कृष्ण बचपन से ही नटखट थे जो गोपियों को दही और माखन चुराते थे मथुरा के राजा कंस ने श्री कृष्ण को करने के लिए एक राक्षसी पूतना को भेजा था जिसे भगवान को दूध पिलाकर मारना चाहा लेकिन भगवान ने उसे मार डाला।
महाराज श्री ने बताया भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी की शिकायते हर दिन यशोदा के पास आती थी। जब यशोदा उससे पूछता तो वे अपने मुख पर लगे मकान को दिखा देते जिससे यह पता चलता है कि भगवान कितने चतुर थे श्रीकृष्ण ने कईअसुरों का वध किया। महाराज श्री ने कहा गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पड़वा को मनाई जाती है। जिसमें भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा होती है।
आज विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भागवत कथा का श्रवण किया एवं महाराज श्री से आशीर्वाद लिया। आज की कथा में 56 भोग भी लगाया गया।
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