सत्य का मार्ग सबसे कठिन होता है लेकिन ये मार्ग भगवान के सबसे करीब होता है-आचार्यश्री

Sep 01 2025

ग्वालियर। दिगंबर जैन समाज के चल रहे पर्युषण पर्व के दौरान नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म के उपलक्ष्य में प्रतिदिन कर रहे आध्यात्मिक साधना के व्रतधारी शिवार्थियो ने दशलक्षण विधान में भगवान जिनेंद्र की पूजा-अर्चना कर हाथों में महाअर्घ्य श्रीफल लेकर मंडप पर समर्पित करें। सन्मति सुबल वर्षायोग समिति तथा सकल जैन समाज के तत्वावधान में आध्यात्मिक श्रावक साधना शिविर 200 शिवार्थियो और जैन समाज के धर्मावलंबियों ने दशलक्षण विधान में उत्तम सत्य धर्म का गुणगान कर भक्ति आराधना की गई। 
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने उत्तम सत्य पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तम सत्य का मार्ग सबसे कठिन होता है लेकिन ये मार्ग भगवान के सबसे करीब होता है। सत्य संवार्ग होता है। जो मुख से बोला जाए वो हमेशा पूर्ण सत्य नहीं हो सकता है। सत्य शुरू में परेशान जरुर होता है लेकिन विजय सत्य की होती है। आप सत्य के मार्ग पर चले हो ऐसे में सत्य के साथ लक्ष्मी और प्रेम भी साथ में रहता है। सत्य के मार्ग पर चलने से ही सच्ची समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्त होता है, न कि झूठ या चालाकी से। झूठ और चालाकी धीरे-धीरे आत्मा को खोखला कर देती है और सच्ची समृद्धि से दूर ले जाती है, जबकि सत्य ही विश्वास का आधार है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि सुबह से शिवार्थियो ने आचार्य श्री सुबल सागर और मुनिराजों के सानिध्य में ध्यान की साधना की।