पर्यूषण पर्व पर शिवार्थियो ने चढ़ाया निर्वाण लाडू

Aug 31 2025

ग्वालियर। नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में चल रहे पर्युषण महापर्व के चौथे दिन रविवार को आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में ओर सन्मति सुबल वर्षायोग समिति तथा सकल जैन समाज के तत्वावधान में आध्यात्मिक श्रावक साधना शिविर के शिवार्थियो और जैन धर्मावलंबियों ने दशलक्षण विधान में उत्तम शौच धर्म की आराधना की गई। जिसमे आज जैन धर्म के नवें तीर्थंकर पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव  पर निर्वाण लड्डू भक्ति एवं श्रद्धा के साथ चढ़ाया गया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर और मुनिराजों के सानिध्य में दशलक्षण पर्व के चौथे दिन को उत्तम शौच धर्म के रूप में आत्मसात किया गया। 
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कषाय की क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी चार संतानें हैं। इन चारों में लोभ नाम की संतान सभी पापों, दुखों की जनक है। इसलिए लोभ को पाप का बाप कहा गया है। लोभी व्यक्ति आवश्यकता से अधिक धन एवं अन्य चल-अचल संपत्ति के संग्रह की इच्छा पूर्ति के लिए अनुचित कार्य में लगा रहता है।लोभ की निवृत्ति उत्तम शौच धर्म है, जहां निर्लोभता होगी वहीं शौच धर्म होगा। अपने अंदर निर्लोंभ वृत्ति, संतोष का भाव और आचरण में शुचिता लाना ही शौच धर्म है। लोभ को जीतना और अपनी आत्मा में शौच धर्म प्रकट करना है तो अपनी इच्छाओं और आवश्यकता से अधिक संग्रह की प्रवृत्ति पर नियंत्रण करो एवं जो है उसमें खुशी, संतुष्टि और संतोष महसूस कर सोच धर्म का पालन करो।