जो मिला है उसी में संतुष्ट रहना चाहिए:आचार्यश्री
Aug 21 2025
ग्वालियर। क्रोध से ज्ञान नष्ट होता है। संयम चला जाता है। जीवन में धैर्य जरूरी है। यहां कुछ भी हमारा नहीं है। जब धन बढ़ता है, तब इंसान भगवान को भूल जाता है। जो मिला है, उसी में संतुष्ट रहो। धन का सदुपयोग करो। धन को मंदिर ओर अच्छे धार्मिक कार्यों में दान करो। यही जीवन का सच्चा उद्देश्य है। इंसान खाली हाथ आता है। खाली हाथ ही जाता है। अकेला आता है, अकेला ही जाता है। साथ जाता है तो सिर्फ - भगवान का नाम, दान और धर्म। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि दान करना एक पुण्य कार्य है और इससे व्यक्ति को अगले जन्म में भी अच्छे फल प्राप्त होते हैं। दान परिग्रह का प्रायश्चित है।धन का सदुपयोग दान के रूप में करना चाहिए, क्योंकि धन का एक हिस्सा दूसरों की भलाई के लिए भी होना चाहिए। धन का संचय करना ठीक है, लेकिन इच्छाओं को सीमित रखना चाहिए और जरूरत पडऩे पर दूसरों की मदद करनी चाहिए। दान करने से व्यक्ति को पुण्य प्राप्त होता है और उसका जीवन सफल होता है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास स्थल जिन सहस्त्रनाम विधान में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का कलशों से अभिषेक जैन समाज के लोगो ने जयकारों के साथ किया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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