धर्म में तपस्या, श्रेष्ठ श्रृंगार व आत्मा की शुद्धि का माध्यम:सुबल सागर

Aug 19 2025

ग्वालियर। धर्म में तपस्या का जीवन का श्रृंगार है। आत्मा की शुद्धि का सबसे बड़ा माध्यम है। सभी धर्मों और पंथों में तपस्या को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। तपस्या जीवन में सकारात्मकता का संचार करते हुए श्रेष्ठता के गुणों को प्रदान करती है। तपस्या जीवन को सद् गुणों से श्रृंगारित करते हुए आत्मा को शुद्धता प्रदान करती है। तपस्या मनुष्य जीवन को सार्थकता प्रदान करती है। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि तप केवल बाहरी ही नहीं अंतरंग भी होता है। हमें उपवास के साथ अंतरंग तप का भी पालन करना चाहिए। तप कर्मों की निर्जला होती है। तप मोक्ष का सबसे बड़ा साधन है। ज्ञान, तप और संयम से मोक्ष की प्राप्ति होती है। तप को अग्नि की तरह कहा गया है। अग्नि में किसी भी पदार्थ की मौलिकता नष्ट नहीं होती। संसार में कोई भी वस्तु तप के माध्यम से ही श्रेष्ठ होती है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के मार्ग दर्शन में चातुर्मास स्थल जिन सहस्त्रनाम विधान में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का कलशों से अभिषेक जैन समाज के लोगो ने जयकारों के साथ किया।