संगीत का तीर्थ स्थल है ग्वालियर: नरेंद्र सिंह तोमर

Aug 19 2025

ग्वालियर। मंगलवार को आईआईटीटीएम का सभागार संगीत की लहरियों से गुंजायमान दिखा, जिसमें युवा कलाकारों द्वारा कथक नृत्य से कृष्ण की छवियों और लीलाओं का वर्णन मंच से दिखाई दिया साथ ही कला की अन्य विधाओं का भी अद्भुत प्रदर्शन मंच से दिखाई दिया। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के 18वें स्थापना दिवस पर गायन, वादन, नृत्य से लेकर चित्रकला का प्रदर्शन छात्र छात्राओं द्वारा किया गया। इसमें कष्णायन- नृत्य रूपक की प्रस्तुति सबसे खास रही, जिसे इंदौर से आई कथक गुरू डॉ. सुचित्रा हरमलकर के निर्देशन में 15 कलाकारों द्वारा प्रदर्शित किया गया। लगभग 50 मिनट की इस प्रस्तुति में कृष्ण की लीलाओं को कथक के माध्यम से दिखाया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ गणेश वंदना से हुआ। इसमें पश्चात सादरा ताल झपताल में हुई प्रस्तुति में श्री कृष्ण के जीवन के हर पहलू की दिखाया गया। फिर कृष्ण लीला द्वारा कृष्ण की गई लीलाओं और उनके उद्देश्यों को बताने की कोशिश की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यह संयोग की बात है कि राजा मानसिंह तोमर का जन्मदिन और संगीत विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस एक ही दिन है। शास्त्रीय संगीत का तीर्थ स्थल है ग्वालियर यह अब विश्व स्तर पर लोग मान चुके हैं। इसे विश्व स्तर की पहचान दिलाने में हमारे पूर्वजों ने कई मानक तय किए हैं। इस शहर कि प्राचीन विरासत का संरक्षण करना हम सबका दायित्व है।
विशिष्ट अतिथि श्रीधर पराडकर ने कहा कि ग्वालियर की पहचान संगीत से है यह अब विश्व स्तर पर प्रमाणित हो चुका है। कई महान संगीत साधकों की तपोभूमि यह शहर रहा है।
कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि अपनी स्थापना से लेकर अभी तक इस विश्वविद्यालय ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं और कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। यहां के छात्रों ने इस शहर और देश का नाम दुनियाभर तक संगीत के माध्यम से पहुंचाया है।
कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह तोमर, श्रीधर पराडक़र रहे। यशवंत इंदपुरकर, कुलसचिव अरूण सिंह चौहान, डॉ. आशुतोष खरे, चंद्रप्रताप सिकरवार, डॉ. अंजना झा, डॉ. मनीष करवड़े, डॉ. संजय सिंह, डॉ. श्याम रस्तोगी, पीआरओ कुलदीप पाठक आदि मौजूद रहे। संचालन सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने किया।