संस्कृत भारतीय संस्कृति की जीवन शक्ति हैं
Aug 13 2025
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय भाषा अध्ययन केंद्र में संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत दिवस का आयोजन किया गया। आयोजन में भाषा अध्ययनशाला के समन्वयक प्रो. नवनीत गरुड़ की विशेष उपस्थिति रही। संस्कृत दिवस पर मुख्य वक्ता एमएलबी कॉलेज के डॉ. अशोक विश्नोई द्वारा उद्बोधन दिया गया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में संस्कृत की उपयोगिता महत्व और रोजगार के अवसर कैसे प्राप्त करें, साथ ही संस्कृत केवल भाषा न होकर, सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति की जीवनशक्ति है। विद्यालय स्तर से लेकर विश्वविद्यालय तक संस्कृत के विभिन्न अवसर सरकार द्वारा प्रदान किए जाते हैं इतना ही नहीं संस्कृत छात्रों को छात्रवृत्तियां भी प्रदान की जाती हैं।
केंद्रीय संस्कृत संस्थान जयपुर राजस्थान से राम तिवारी ने संस्कृत भाषा की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिकता विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि संस्कृत में निहित ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और साहित्य आज भी विश्व को दिशा निर्देशन कर रहे हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में भाषा अध्ययन केंद्र के संयोजक डॉ. नवनीत गरुड़ ने कहा है कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन विभाग में होते रहें जिससे कि छात्रों में संस्कृत के प्रति रुझान और लगाव पैदा हो और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर राष्ट्र के विकास में सहयोग प्रदान करें। गीत प्रस्तुति हिना आसिफ के द्वारा की गयी। कार्यक्रम का संचालन अतुल दीक्षित ने किया।
कार्यक्रम में डॉक्टर वंदना कुशवाह, डॉ मंजू चौहान डॉ धर्मेंद्र शर्मा, डॉ मंजू लता आर्य, डॉक्टर रीना पाठक, डॉ पूजा वर्मा, शुभांगी धीरू बढ़ाना, शिवानी, शालिनी सतीश, निखिल निशांत, अरेन्द्र यादव, योगेश कुमार, ज्योति पाठक वेदवीर, सूरज सहित प्राध्यापकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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