पुण्य से धन कमाओ और धर्म पुण्य के कार्यों मे लगाओ: आचार्यश्री

Aug 12 2025

ग्वालियर। दान देने वाले का हृदय विशाल होता है, मनुष्य कमाता दो हाथ से और खाता एक हाथ से, पुण्य से धन कमाओ और धर्म के पुण्य कार्यों मे लगाओ। करोड़ों व्यक्तियों में एक दाता होता है। दान देते समय विशुद्धि है तो भगवान बनता है। दान देने से जीवन व धन दोनों सफल होते हैं। अपने साधनों के अनुरूप दान करो, अन्यथा ईश्वर तुम्हारे दान के अनुरूप तुम्हारे साधन बना देगा। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि जो मनुष्य अपनी बढ़ती हुई लक्ष्मी को सर्वदा परोपकार के कार्यों में देता है, उसकी लक्ष्मी सदा सफल है। हमारे देश में त्यागी की पूजा होती है और दानी की प्रशंसा त्याग ही जीवन में सम्मान कराता है, त्याग ही जीवन के सौन्दर्य को निखारता है। गुप्त दान देने से करोड़ गुना पुण्य होता। दान देने वाला ऊपर उठता जाता है। दान का सीधा मतलब है अपने तन, मन और धन से औरो की सहायता करना।दान से इंसान का नसीब खुलता है  दान देने से पूरी दुनिया में यश कीर्ति फैलती है।
 आचार्यश्री सुबल सागर ने कहा कि सही धर्म अपने परिवार से मिलजुल कर रहना है, अपने माता-पिता का आदर करना, छोटों को प्यार करना, आस-पड़ोस में सभी से मिलकर रहना, सभी के दुख तकलीफ में साथ देना और कभी किसी से ईष्र्या ना करना ही सही धर्म है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में इंजी.राजमल जैन के मार्ग दर्शन में चातुर्मास स्थल जिन सहस्त्रनाम विधान में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का कलशों से अभिषेक जैन समाज के लोगो ने जयकारों के साथ किया।