फल हमें अकेले ही भोगना पड़ता है-आचार्यश्री
Aug 04 2025
ग्वालियर। एक जीव जो कार्य करता है, वही जीव उस कर्म को भोगता है और संसार में भ्रमण करता है। हमें लगता है कि हमारे पड़ौसी हैं, रिश्तेदार हैं, पर हमारा कोई नहीं होता है। जब कर्म किया था तब बहुत साथी आए थे, जब कर्म होता है तो बहुत लोग साथ होते हैं। आज भोगना पड़ रहा है तो मात्र हम अकेले ही हैं। फल हमें अकेले ही भोगना पड़ता है। जगत में हमारा कोई मित्र और शत्रु नहीं है। इसलिए आए हुए क्रोध को त्याग करना चाहिए, क्योंकि क्रोध तो 48 मिनिट बाद शांत हो जाता है।
यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्यश्री ने कहा कि जैन तीर्थ गिरनार जी की सुरक्षा के लिए सभी जैन समाज को एकजुट होना पड़ेगा। युद्ध को जीतना है तो शक्ति चाहिए। यह शक्ति हमें संगठित होने से ही मिल सकती है, हम क्षत्रिय भी हैं और हम व्यापारी भी। हम झुकने वाले नहीं है। हम अपने तीर्थ पर कब्जा नहीं होने देगे। हमें शांति से सब कार्य करना है एक जुटता दिखानी है। हम जब तक मजबूत नही होंगे तब तक किसी की ताकत नहीं कि कोई हमें रोक ले। तीर्थ की रक्षा के लिए समाज के हर व्यक्ति को एकजुट होना ब पड़ेगा।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









