जीवाजी यूनिवर्सिटी में हुआ अंर्तराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

Aug 02 2025

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी अध्ययनशाला द्वारा शमानव स्वास्थ्य के लिए पादप जैव प्रौद्योगिकी और फेज चिकित्सा में नवाचार विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को समापन हो गया। 
समापन कार्यक्रम में प्रो. लोरेन अल्फिन ने कहा कि संगोष्ठी के माध्यम से एक दूसरे के साथ ज्ञान का आधार प्रदान करने का मौका मिला। यहां के शोधार्थी बहुत ही अच्छे हैं और उनका ज्ञान का स्तर भी काफी अच्छा है। उन्होंने कहा कि पादप जैव प्रौद्योगिकी, पौधों को विशिष्ट आवश्यकताओं या अवसरों के अनुकूल बनाने के लिए पादप कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों का उपयोग है। इसमें आनुवंशिक इंजीनियरिंग, टीके और ऊतक संवर्धन जैसी कई तकनीकें शामिल हैं।
संगोष्ठी में जेआरडी विश्वविद्यालय चित्रकूट के कुलगुरू डॉ. शिशिर कुमार पाण्डेय ने कहा कि पादप जैव प्रौद्योगिकी और फेज चिकित्सा दोनों ही मानव स्वास्थ्य में सुधार के लिए शक्तिशाली उपकरण हैं। इन प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान और विकास की आवश्यकता है। वनस्पति के माध्यम से दवाइयां और अन्य क्षेत्रों में विकास संभव है। 
कार्यक्रम में जेयू के कुलगुरू डॉ. राजकुमार आचार्य ने कहा कि प्लांट बायोटेक्नोलॉजी और मानव स्वास्थ्य के लिए फेज थेरेपी में नवाचार पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और छात्रों को फेज थेरेपी की तुलना में अनुप्रयुक्त जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विभिन्न मौजूदा विकासों पर विचार विमर्श करने के लिए एक मंच प्रदान करना था। इस दो दिवसीय संगोष्ठी से निश्चित ही सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आएंगे।
 कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को शाल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के समापन दिवस में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रो. सैंड्रा होप ने मधुमक्खियों में अमेरिकन फाउलब्रूड की रोकथाम के लिए पैनीबैसिलस लार्वा फेज पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। प्रो. लोरेन अल्फिन ने मानव केंद्रित दुनिया में दुर्लभ पौधों का संरक्षण पर शोध कार्य प्रस्तुत किया। डॉ. एस पोनमारीअप्पन ने बोटुलिनम विषाक्त पदार्थों का पता लगाने और रोकथाम में हालिया प्रगति पर शोध कार्य प्रस्तुत किया। चिया वेई वांग ने चयापचय नियंत्रण को समझने के लिए सूक्ष्मजीवों का उपयोग पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।