प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली केवल डिग्री प्राप्ति तक सीमित नहीं: पंकज नाफडे

Aug 01 2025

ग्वालियर। माधव प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान में व्यास पूजन कार्यक्रम का आयोजन भारतीय शिक्षण मंडल के तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता पंकज नाफड़े  व मुख्य अतिथि डॉ. राजेश तोमर उपस्थिति रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान की प्रो-वाइस चांसलर डॉ. मंजरी पंडित के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल शिक्षा के क्षेत्र में भारतीयता के समावेश हेतु कई वर्षों से निरंतर कार्य कर रहा है, जिसमें व्यास पूजन एक महत्वपूर्ण अवसर है।
मुख्य वक्ता पंकज नाफड़े ने अपने उद्बोधन में कहा की विद्यार्थियों को चुंबक की तरह होना चाहिए जिस प्रकार चुंबक लोहे को अपनी ओर खींचता है, वैसे ही एक विद्यार्थी को चाहिए कि वह अपने आसपास से ज्ञान, मूल्य, अनुभव और प्रेरणादायक तत्वों को आकर्षित करे। लेकिन साथ ही, एक अच्छा चुंबक भी केवल उपयोगी धातु को ही खींचता है कचरा या अनुपयोगी चीज़ें नहीं। उसी तरह विद्यार्थियों को भी नकारात्मक संगत, बुरी आदतों और व्यर्थ की बातों से स्वयं को दूर रखना चाहिए। 
उन्होंने कहा की जीजगदीश चंद्र बसू ने अपने प्रयोगों से सिद्ध किया कि धातु में भी प्राण होता है यह कथन सिर्फ वैज्ञानिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक सत्य है, जो यह बताता है कि हर वस्तु चाहे वह सजीव दिखे या नहीं ब्रह्मांडीय ऊर्जा या चेतना से जुड़ी हुई है।
मुख्य अतिथि डॉ. राजेश तोमर ने कहा कि हमें भारत की संस्कृति और सभ्यता पर गर्व करना चाहिए, जो अनेक विदेशी आक्रमणों के बावजूद आज भी अमिट और जीवंत बनी हुई है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मनीष सागर ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. मनोज सिंह गुर्जर, डॉ. सीएस मालवीय व विद्यार्थी उपस्थित रहे।