ग्वालियर में गायन महज प्रस्तुति नहीं बल्कि ऋण उतारने जैसा है:शाश्वती मंडल

Jul 29 2025

ग्वालियर। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की विस्तृत व्याख्यानमाला के क्रम में सोमवार को शिखर सम्मान से सम्मानित दिल्ली से आई ग्वालियर घराने की गायिका शाश्वती मंडल का व्याख्यान सह प्रदर्शन हुआ। संगीत संकाय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने गायन से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। ग्वालियर घराने की परंपरा को समर्पित ये प्रस्तुतियां श्रोताओं के लिए जीवंत शास्त्रीय अनुभव रहा। उन्होंने मन को मुग्ध करने वाली प्रस्तुति के साथ छात्रों को भी गायकी की बारीकियों से परिचित कराया।
 ग्वालियर के राजगायक विद्वान कुंडल गुरु की प्रपौत्री शाश्वती मंडल ने कहा कि ग्वालियर में गायकी महज प्रस्तुति नहीं बल्कि यह ऋण उतारने जैसा है क्योंकि इस शहर से मैने बहुत कुछ सीखा है। जिद करो कि रोज रियाज करना है तभी आप कलाकार बनने का रास्ता तय कर पाओगे।
 शाश्वती मंडल ने राग देश में विलंबित तिलवाड़ा में सखी मैं का चैन न आवे... से गायन आरंभ किया। उनकी गायकी में सुरों की सौम्यता और गम्भीरता, राग विस्तार की स्पष्ट रेखाएं, और ग्वालियर घराने की लयकारी की स्पष्ट झलक देखने को मिली। इसके बाद मध्यलय तीनताल में गुंद गुंद लावो रे मलनिया. ने कार्यक्रम को ऊर्जा से भर दिया।
उन्होंने छात्रों को राग यमन में गा रे मन, निसि दिन राम नाम बंदिश सिखाई। इस रचना में शब्द स्वयं स्वर बनते चले जाते है। यह रचना प्रीतम भट्टाचार्य द्वारा रचित थी, जिसे तीन ताल में बहुत सहजता और आत्मीयता से प्रस्तुत किया गया। यह क्षण सभी के लिए विशेष और मार्मिक रहा। कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में कुलसचिव अरुण सिंह चौहान, वित्त नियंत्रक डॉ आशुतोष खरे, डॉ मनीष करवड़े, डॉ संजय सिंह, डॉ पारुल दीक्षित, डॉ श्याम रस्तोगी, डॉ स्वप्ना मराठे, डॉ वीणा जोशी, अनूप मोघे, पीआरओ कुलदीप पाठक सहित छात्र छात्राएं मौजूद रहे।