लालन-पालन एक जिम्मेदारी, एक तपस्या और एक कला है-बबीता धाकड़

Jul 25 2025

ग्वालियर। संगत संस्था द्वारा सहारा परियोजना के अन्तर्गत डबरा तहसील कार्यालय परिसर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए लालन-पालन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य 0-3 वर्ष के बच्चों के समुचित शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास के लिए कार्यकर्ताओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी श्रीमती बबीता धाकड़ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में श्रीमती बबीता धाकड़ ने कहा कि लालन-पालन एक जिम्मेदारी, एक तपस्या और एक कला है। यह केवल माता-पिता का ही कार्य नहीं, बल्कि पूरे समाज की सहभागिता से पूर्ण होता है। यदि हम आने वाली पीढ़ी को संस्कार, प्रेम, अनुशासन और शिक्षा के साथ बड़ा करें, तो निश्चय ही एक सशक्त, समर्पित और संवेदनशील समाज का निर्माण संभव है।
प्रशिक्षण सत्र में जिला समन्वयक बालकिशन त्रिपाठी एवं पीयूष रघुवंशी द्वारा पोषण, साफ-सफाई, मानसिक स्वास्थ्य, माता-पिता की भूमिका तथा बच्चों के प्रारंभिक विकास से जुड़ी जानकारियां प्रतिभागियों को प्रदान की। उन्होंने व्यवहारिक गतिविधियों और समूह चर्चा के माध्यम से कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशिक्षण की शुरुआत करते हुए बालकृष्ण त्रिपाठी जी ने कहा कि बाल विकास की नींव आंगनवाड़ी में ही रखी जाती है, इसलिए कार्यकर्ताओं को लालन-पालन के हर पहलू की समझ होनी चाहिए। 
समापन अवसर संस्था सुपरवाइजर रिजवाना खान ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सहाना खानम, विशाल राजावत ने कार्यकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ देने हेतु प्रेरित किया।