युवा पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोडऩे की जरूरत-आचार्यश्री

Jul 24 2025

ग्वालियर। जिस व्यक्ति के घरों में साधु संतो का आगमन नहीं होता वह घर नर्क के बराबर है। हर व्यक्ति को साधु संतो को अपने घर पर धर्म के प्रतीक शुद्ध आहारचर्या के दौरान नवधाभक्ति के साथ प्रवेश करना चाहिए, जिसे आने वाली पीढ़ी भी धर्म संस्कार से जुड़ेगी। आज की युवा पीढ़ी धर्म और संस्कारों से दूर होती जा रही है। उनका जीवन दिशाहीन होता जा रहा है, जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह माता-पिता की व्यस्तता है। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने गुरुवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि आज अभिभावकों के पास बच्चों के लिए समय नहीं है। मां गृहकार्य और निजी जिमेदारियों में उलझी है तो पिता अपने व्यवसाय और सामाजिक जीवन में व्यस्त हैं। इस स्थिति में बच्चे अपने को अकेला और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। अभिभावकों की यह जिमेदारी बनती है कि वे बच्चों को सही मार्गदर्शन दें, उन्हें धर्म, परिवार और समाज से जोड़ें। उन्होंने कहा कि संस्कृति वाणी और व्यवहार दोनों में झलकती है। मीठा बोलो, नम्र रहो, बुजुर्गों का समान करो, यही संस्कृति है।यदि मन द्वेष से भरा हो। संस्कृति वह है जो भीतर से पवित्रता लाए और व्यवहार में प्रेम और सौजन्य प्रकट हो। देवता नहीं, देवत्व चाहिए। संस्कृति आडंबर से नहीं, आत्मिक आचरण से जुड़ी होनी चाहिए। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास स्थल जिन सहस्त्रनाम विधान में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का कलशों से अभिषेक जैन समाज के लोगो ने जयकारों के साथ किया।