धर्म ही संसार के दुखों से निकालकर सुख के सागर की ओर ले जाता है-आचार्यश्री

Jul 23 2025

ग्वालियर। जीवन में धर्म से बढक़र दूसरी और कोई नेकी नहीं है और उसे भुला देने से बढक़र दूसरी कोई बुराई नहीं है। दुनिया में सबसे बड़ी अच्छाई है धर्म को धारण करना। धर्म के बिना ज्ञान प्राप्त करना भार हो जाता है। धर्म ही संसार के दुखों से निकालकर सुख के सागर की ओर ले जाता है। पापों से दुख और पुण्य से सुख का संचय होता है। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने बुधवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि आनंद में जीवन जीने का उत्तम सूत्र है धर्म का आचरण करना। मनुष्य जीवन की इसी में सार्थकता है कि उन्नत आचार और मधुर व्यवहार हो। सुख और शांति को प्राप्त करना ही धार्मिक व्यक्ति का लक्ष्य होता है। धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है । संसार में रहते हुए भी हम धर्म के बल पर सात्विक जीवन जी सकते हैं। धर्म हमें शक्ति देता है, प्रेरणा देता है, हमें दुखों से छुटकारा दिलाता है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्य श्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य विवेक शास्त्री के मार्ग दर्शन में चातुर्मास स्थल जिन सहस्त्रनाम विधान में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का कलशों से अभिषेक जैन समाज के लोगो ने जयकारों के साथ किया।