कर्म के साथ किसी की चतुराई नहीं चलती:सुबल सागर

Jul 19 2025

ग्वालियर। तुम्हारी चतुराई हमारे और तुम्हारे बीच रह सकती है, लेकिन कर्म के साथ किसी की चतुराई नहीं चलती। कर्म का दरबार सत्य का दरबार है। यहां जो जैसा बोया वैसा ही काटना पड़ता है। तिल-तुष मात्र न तो घटता है, न बढ़ता है और न ही बंधे कर्म में अपने अनुसार फेरबदल होता है। संपूर्ण विश्व का वास है उसका नाम सत्य है। जिसमें विष का वास होता है उसका नाम असत्य है। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने नई सडक़ स्थित चंपाबाग मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि जब व्यक्ति के तीव्र पाप कर्म का उदय होता है तो छोटे-छोटे पुण्यात्मा भी उसके साथ डूब जाते हैं और जब किसी का पुण्योदय होता है तो उसके तीव्र पुण्योदय से अच्छे-अच्छे, छोटे-छोटे पापी भी तर जाते हैं। राजा वसु कभी झूठ नहीं बोलते थे। जब राजा वसु ने एक बार झूठ बोला तो मय सिन्हांसन के नरक चला गया। एक झूठ राजा को नरक भेज सकता है तो हमारा क्या होगा इस पर चिंतन करना जरूरी है। यह मन की दुर्बलता है। झूठा व्यक्ति ही सदैव भयभीत रहता है, न मालूम कब उसके झूठ का भेद खुल जाए। सत्य के बिना अभय नहीं होता है। सत्यनिष्ठ निर्भीक और निर्भय होता है। सत्य की सदैव विजय होती है।उन्होंने कहा कि जीवन का शाश्वत सुख प्राप्त करना है, तो मन, वचन, कार्य से सत्य आचरण को अपने जीवन में प्रतिष्ठित करने की जरूरत है।