श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग का जो महत्व है वह किसी महीने में नहीं है

Jul 17 2025

ग्वालियर। भागवताचार्य पंडित श्रीनिवास शास्त्री ने कहा है कि श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग का जो महत्व है वह अन्य किसी महीने में नहीं है क्योंकि भगवान शिव का सबसे प्रिय यदि कोई महीना है तो वह श्रावण मास का है। श्री शास्त्री ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि श्रावण मास में यदि गलती से भी कोई पांच पार्थिव शिवलिंग बना दे तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने चर्चा करते हुए बताया कि यदि श्रावण मास में शिव महापुराण की कथा सुनने को मिल जाए तो उसके कई जन्मों के पाप मुक्त हो जाते हैं।
उन्होंने चर्चा करते हुए बताया कि पिछले कई वर्षों से अमृतेश्वर महादेव मंदिर पर श्रावण मास में शिव महापुराण की कथा एवं सवा लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया जाता है इस पार्थिव शिवलिंग के निर्माण के लिए काफी दूर से भक्तगण आते हैं एवं पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
 पत्रकार वार्ता में भगवती प्रसाद गुप्ता, विनय तोमर, ऋषि कटारे, सुरेंद्र सिंह, अशोक शर्मा, अरुण तिवारी, सुरेंद्र सिंह सिसोदिया, पप्पू दुबे, डब्बू कपूर, भूपेंद्र सिंह सिकरवार, संजीव सिंह सिकरवार, चेतन बाजपेई, अरविंद, अरुण तोमर सहित अनेक भक्तगण उपस्थित थे।
 भगवान शिव कुरुप को भी सुंदर बना देते हैं 
अमृतेश्वर महादेव चल रही शिव महापुराण के चौथे दिन कथा व्यास श्रीनिवास शास्त्री ने सोमनाथ मंदिर की कथा सुनाई उन्होंने बताया की राजा दक्ष की 27 पुत्रीयों का विवाह राजा चंद्र के साथ हुआ था। लेकिन वह एक रानी को ही ज्यादा प्यार करते थे। जिससे दुखी होकर अन्य रानियों ने इसकी शिकायत अपने पिता राजा दक्ष से की। तब राजा दक्ष ने क्रोधित होकर चंद्र को कुरुप होने का श्राप दिया।
जब चंद्र द्वारा हजारों साल तक भगवान शिव की आराधना की गई तब प्रभु भोलेनाथ प्रसन्न हुए और चंद्र को कला की तरह निखरने का वरदान दिया। भगवान चंद्र ने जिस जगह शिवजी की आराधना की उसी जगह भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए और उस जगह का नाम सोमनाथ पड़ गया।