काली पट्टी बांधकर जैन समाज ने विरोध कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

Jul 16 2025

ग्वालियर। गुजरात राज्य के जूनागढ़ स्थित जैन तीर्थ गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर जैन समाज के लोगों को पूजा के अधिकार से वंचित रखने के विरोध में भारतीय जैन मिलन क्षेत्र 2 की विभिन्न शाखाएं एवं सकल जैन समाज ग्वालियर के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। दोनों संगठनों के प्रतिनिधि मंडल ने इस मुद्दे पर विरोध स्वरूप गुजरात के मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नाम भारतीय जैन मिलन परिवार ओर सकल जैन समाज ग्वालियर के समाजजनों ने ग्वालियर जिला कलेक्ट्रेट  पहुंचकर हाथों में काली पट्टी बांधकर भगवान के नेमिनाथ के जयकारे लगाकर विरोध प्रदर्शन करते हुए एसडीएम नरेश बाबू यादव को जैन मिलन के महेंद्र टोंग्या ने समाज की भावनाएं को रखते हुए ज्ञापन पढक़र सुनाया। 
जैन समाज की ओर से ज्ञापन में तीन मांगें भी रखीं गई है।1 एएसआई और राज्य सरकार के गजेटियर का पालन सुनिश्चित किया जाए और अवैध दत्तात्रेय की पूर्ति को हटाया जाए। 2 गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक को संरक्षित जैन राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। 3 अल्पसंख्यक जैन समाज की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर जैन समाज को पूजा के अधिकार से वंचित न किया जाए।
जैन समाज का कहना है कि भारत गणराज्य का संविधान सभी नागरिकों को उनके धर्म के पालन की स्वतंत्रता प्रदान करता है, इसमें किसी को भी हस्तक्षेप का अधिकार नहीं देता है। लेकिन दो जुलाई 2025 को गुजरात में जूनागढ़ जिले के गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर जाने और पूजा करने से रोका जा रहा है। जबकि वहां जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ मोक्ष पर गए थे और देश भर से आए हजारों जैन धर्मावलंबियों को उनके पूजा के अधिकार से वंचित रखा गया। न तो भगवान का जयकारा बोलने दिया न ही कोई पूजन की द्रव्य अर्पित करने दिया। निर्वाण लाड़ू अर्पित करने से भी रोक दिया गया। यहां तक कि पुलिस के द्वारा से 10 से अधिक स्थानों पर चैकिंग की गई, कोई पूजन की द्रव्य नहीं ले जाने दिया, बल्कि जिनके पास थी, उसे भी छीन लिया गया। जबकि भारत सरकार के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग एवं गुजरात राज्य गजेटियर, में स्पष्ट रूप से यह प्रमाणित किया गया है कि गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक मूल रूप से जैन तीर्थ है। प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि जबकि गुजरात उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 में स्पष्ट आदेश दिया था कि गिरनार पर्वत की पंचम टोंक पर कोई नया निर्माण न किया जाए।