अगर हमारी भक्ति में श्रद्धा का भाव है तो चमत्कार हो सकता है-सुबल सागर

Jul 13 2025

ग्वालियर। चमत्कार हमारी श्रद्धा में है, जिन प्रतिमा मैं नहीं। हम श्रद्धा का भाव रखकर भक्ति करते हैं तो हमें चमत्कार दिखाई देता है। श्रद्धा ज्ञान का मार्ग है और ज्ञान से चरित्र का निर्माण होता है। श्रद्धा मोक्ष मार्ग की पहली सीढ़ी है। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने रविवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति कितना भी त्यागी या महात्मा हो, अगर उसके पास श्रद्धा नहीं है तो उसका कुछ भी करना व्यर्थ है. धैर्य रखने वाला व्यक्ति ही मोक्ष मार्ग पर चल पाता है और संशय की स्थिति में मनुष्य भटक जाता है।भक्ति, श्रद्धा और समर्पण से ही भगवान की प्राप्ति होती है।भक्ति का अर्थ है भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण। सभी को निस्वार्थ भाव से भक्ति करने, श्रद्धा रखने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। वही आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने मंत्रो से जैन समाज के लोगो ने भवन महावीर स्वामी का कलशों से अभिषेक किया।  
मातृ पितृ वंदन समारोह आज
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में मातृ पितृ वंदन समारोह 14 जुलाई सोमवार को प्रात: 8:30 बजे से नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में आयोजित किया जायेगा।