केवल शब्दों की डोरी से गीत नहीं बंधता

Jul 13 2025

ग्वालियर। मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा दौलतगंज के तत्वावधान में इंगित काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि  गीतकार ललित मोहन त्रिवेदी एवं विशिष्ट अतिथि दिनेश विकल रहे। अध्यक्षता राजकिशोर वाजपेयी ने की। सभा प्रतिनिधि के रूप में सभा अध्यक्ष डॉ. कुमार संजीव मंचासीन रहे। काव्य गोष्ठी में 32 रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। 
जिसमें राजकिशोर वाजपेई ने जल के बिन जीवन कब होता, बिन इसके रसधार नहीं है। ललित मोहन त्रिवेदी ने केवल शब्दों की डोरी से गीत नहीं बनता, इसमें तो खुद ही पूरा बंध जाना पड़ता है। दिनेश विकल ने राह में तुम जो मिलोगे कभी सोचा न था। हमसफर बनकर रहोगे यह कभी सोचा न था। रामचरण रुचिर ने पावस की बूंदें गिरीं धरा हुई खुशहाल, मन मोहक लगने लगे उपवन सरिता ताल। विजय कृष्ण योगी बाधा बन जाने पर हमने पी डाले सागर खारे हैं, अजय ज्योति पुंज के वाहक अधिकारी तो कब हारे हैं। आरती अक्षत उमस भरे दिन बीते अब तो गर्मी पानी-पानी। 
कविता श्रीवास्तव जीवन सांसों का खेल नहीं, यह यात्रा हृदय से अंतस की है। डॉ. रमेश चंद्र त्रिपाठी ने बड़ा सुहाना मौसम आया पावस ऋतु आई। इस मौके पर सुंदरकांड पाठ का भी आयोजन किया गया। संचालन रामचरण रुचिर ने किया। कार्यक्रम में माता-प्रसाद शुक्ला, डॉ. सुखदेव मांखीजा सहित युवा एवं अन्य साहित्यकार उपस्थित रहे।