मुक्तिधाम का कटीली झाडिय़ों के आगोश में मार्ग, कढ़ी मशक्कत में हुआ अंतिम संस्कार

Jul 11 2025

भितरवार। देश को आजादी मिले 78 साल हो गए लेकिन देश के गांवों के हालातों में कतई सुधार नहीं हुआ। लोग आज भी आवश्यक सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। हालात ये हैं। कि गांव में किसी की मौत हो जाए तो उसका अंतिम संस्कार भी आसानी से नहीं हो पाता। 
भितरवार ब्लॉक के अधिकांश गांवों में मुक्तिधाम व्यवस्थित न होने से ग्रामीण काफी परेशान हैं। सिला गांव इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है। जहां एक महिला की मौत हो जाने पर उसके परिजनों ने कटीली झाडिय़ों के आगोश में आए मार्ग से कड़ी मशक्कत से निकलकर मुक्तिधाम पहुंचकर मृतका का अंतिम संस्कार किया। महिला की अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। 
जानकारी के अनुसार विकासखंड के अंतर्गत आने कई गांवों में आज भी मुक्तिधाम सही ढंग से नहीं बने। कुछ जगह मुक्तिधाम हैं। तो वहां जाने के लिए रास्ता कठिनाइयों भरा है। पंचायतों द्वारा लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी इनकी दुर्दशा नहीं सुधरी जनपद पंचायत के अधिकारी के सुस्त रवैया की वजह से सरपंच सचिवों ने मुक्तिधाम के लिए बनाए गए मार्गों को नहीं सुधरवाया है। 
शुक्रवार को ग्राम पंचायत सिला में पूर्व सिंचाई अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह रावत की पत्नी गिरजा रावत की मौत हो गई। जिसका अंतिम संस्कार बड़ी कठिनाइयों से हुआ। परिजन जब मृतका की अंतिम यात्रा लेकर गांव के मुक्तिधाम के लिए रवाना हुए तो उन्हे पूरे मार्ग पर कटीली झाडिय़ों से होने से निकलने में काफी परेशान का सामना करना पड़ा। कढ़ी मशक्कत से ग्रामीण उसकी शव यात्रा लेकर मुक्तिधाम पहुंचे। जहां मृतक का अंतिम संस्कार किया गया। बताते हैं। कि मुक्तिधाम में घास पेड़ खड़े होने से लोगों को अंतिम संस्कार के दौरान काफी परेशान होना पड़ा। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी व्यक्त की।