गुरु भगवान का रूप होते हैं और शिष्य को सही मार्ग दिखाते हैं:आचार्यश्री

Jul 10 2025

ग्वालियर। गुरु भगवान का रूप होते हैं और शिष्य को सही मार्ग दिखाते हैं। गुरु, अज्ञानता को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु, शिष्य के जीवन को सफल और सार्थक बनाते हैं। गुरु हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं। गुरु के बिना ज्ञान नहीं है और ज्ञान के बिना आत्मा का विकास नहीं हो सकता। गुरु, ज्ञान, धैर्य और कर्म का स्रोत हैं। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने गुरुवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग बगीची में गुरु पूर्णिमा एवं विशन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। वही सिद्धचक्र विधान में आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने मंत्रो के साथ इंद्र इंद्राणियों ने मंडप पर 1024 महाअर्घ्य समर्पित करवाए।  
आचार्य श्री ने कहा कि गुरु मिले तो प्रभु वाणी मिली। गुरु वह कड़ी है, जो प्रभु से जोड़ती है। गुरु ही हमारे आस्था के आधार है। गुरु के पास दर्शनार्थी बन कर नहीं शणार्थी बन आना।  
वही जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आज शुक्रवार 11 जुलाई को सिद्धचक्र विधान का समापन सुबह अभिषेक, पूजन एवं विश्वशांति महायज्ञ के साथ होगा।